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विधायक संजीव सरदार, समीर मोहंती, एवं मंगल कालिंदी, जिले के विभिन्न मुद्दों को लेकर ,डीसी कर्ण सत्यार्थी से की मुलाकात 

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संवाददाता : अभिजीत सेन 

जमशेदपुर । पूर्वी सिंहभूम जिले के रैयतदारों को अब तक सड़क निर्माण विभाग द्वारा भूमि अधिग्रहण का मुआवज़ा नहीं मिला है। बुधवार को उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी से मुलाक़ात के दौरान पोटका विधायक संजीव सरदार, बहराघोड़ा विधायक समीर मोहंती, जुगसलाई विधायक मंगल कालिंदी और झामुमो घाटशिला के वरिष्ठ नेता सोमेश चंद्र सोरेन ने इस मुद्दे को सबसे प्रमुखता से उठाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जिले में रोड निर्माण हेतु ज़मीन देने वाले किसानों और ग्रामीणों को जब तक उनका उचित मुआवज़ा नहीं मिलेगा, तब तक न्याय अधूरा रहेगा। विधायकों ने चेतावनी दी कि यदि इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे इस मामले को मुख्यमंत्री तक ले जाएंगे।
पूर्वी सिंहभूम जिले में हुए चौकीदार पदस्थापन में हुई विसंगतियों को दूर करने और बाहरी प्रखंडों में भेजे गए चौकीदारों को गृह प्रखंड में ही पदस्थापित करने का आग्रह भी किया गया। इसके साथ ही उन्होंने लंबे समय से लंबित हरिणा मेला, रंकीनी महोत्सव, नेता जी गूँज महाउत्सव को राजकीय मेला का दर्जा देने की प्रक्रिया पूरी करने पर बल दिया।विधायकों ने भू अर्जन विभाग में हो रही गड़बड़ियों और अनियमितताओं की ओर डीसी का ध्यान दिलाया और तत्काल कार्रवाई की मांग की। बैठक में पूर्वी सिंहभूम जिले के राशन डीलरों के कमीशन की लंबित भुगतान राशि को लेकर भी चिंता जताई गई। सभी विधायकों ने कहा कि कई महीनों से राशन डीलरों को कमीशन की बकाया राशि के चलते डीलरों में असंतोष है और वे हड़ताल में हैं। उन्होंने डीसी से तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने को कहा ।
साथ ही जिले के एकलव्य विद्यालय में घंटी आधारित शिक्षकों की नियुक्ति में आ रही शिकायतों की ओर भी ध्यान दिलाया गया और आवश्यक सुधार करने को कहा गया। वहीं, जिले के सभी स्वीकृत धूमकुड़िया भवनों के निर्माण कार्य को शीघ्र शुरू करने की भी मांग रखी गई।डीसी ने आश्वस्त किया की जल्द ही सभी मामलो में सकारात्मक पहल की जाएगी। वही बैठक में जिले के विधायकों ने क्षेत्र से जुड़े कई अन्य मुद्दे पर भी चर्चा की।
उन्होंने चाटीकोचा के यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड प्रोजेक्ट प्रभावित परिवारों का पुनः पुनर्वास जल्द सुनिश्चित करने की मांग रखी। जिसके तहत विस्थापित परिवारों को भूखंड, आवास ,बिजली, पेय जल और सामुदायिक ढांचा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।

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