
छोटा गम्हरिया में नाले की बदहाली से खेती और आबादी पर संकट, कंपनियों पर अतिक्रमण के आरोप
रिर्पोटर – जगबंधु महतो
बार-बार निरीक्षण के बावजूद नहीं निकला जलनिकासी की समस्या का समाधान, ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और नाले का मूल प्रवाह बहाल करने की उठाई मांग
गम्हरिया : सरायकेला-खरसावां जिले के औद्योगिक क्षेत्र छोटा गम्हरिया में प्राकृतिक जलनिकासी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि टाटा स्टील गम्हरिया के आसपास संचालित कुछ कंपनियों द्वारा खेतों के समीप से गुजरने वाले नाले के हिस्से में कथित निर्माण कर उसका प्रवाह क्षेत्र संकरा कर दिया गया है। इससे बारिश के दौरान जलनिकासी प्रभावित होने और खेती योग्य जमीन तथा आवासीय इलाकों में पानी जमा होने की समस्या बढ़ रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, इकोजोन कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड, फ्रेंड एसोसिएट, गुप्ता फाउंड्री और क्रॉस कंपनी के आसपास नाले की जमीन पर निर्माण किए जाने की शिकायत है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नाले का रास्ता संकरा होने से पानी की निकासी बाधित होती है। इसका खामियाजा किसानों और आसपास रहने वाले परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। कई जगह खेतों में पानी पहुंचने तथा सड़कों पर जलजमाव की स्थिति बनने से कंपनी आने-जाने वाले कामगारों को भी परेशानी होती है।
निरीक्षण हुए, लेकिन समाधान का इंतजार
मामले में ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित अधिकारियों से पहले भी कई बार शिकायत की जा चुकी है। शिकायतों के बाद तत्कालीन प्रभारी एसडीओ निवेदिता नियति, तत्कालीन अंचल अधिकारी अरविंद बेदीया और वर्तमान अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार ने स्थल निरीक्षण भी किया था। इसके बावजूद स्थानीय लोगों के मुताबिक जलनिकासी की समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है।
अब सवाल उठ रहा है कि यदि नाले के प्रवाह क्षेत्र में बदलाव हुआ है, तो उसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए अब तक सीमांकन और पैमाइश की कार्रवाई किस स्तर तक पहुंची है? नाले की भूमि की प्रकृति और संबंधित निर्माणों की वैधता की जांच भी जरूरी मानी जा रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, नाले की वास्तविक सीमा निर्धारित करने और जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में अतिक्रमण या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई कर नाले का मूल प्रवाह बहाल किया जाए, ताकि खेती और रिहायशी इलाकों को जलजमाव से राहत मिल सके।
