
किस करवट लेगी
झारखण्ड की सियासत ?
रांची डेस्क शिवपूजन सिंह….. झारखंड की राजनीति के मिज़ाज़ को समझना इतना आसान नहीं है. जब से ये राज्य बिहार से अलग हुआ. सियासत ने भी कई करवटे ली. भ्रष्टाचार के छींटे नेताओं की कमीज को गंदी करती रही है. नई पार्टी का उदय और अस्त और दल बदल के कितने किस्से देखें-सुने जा चुके हैं. दो दशक से ज्यादा बीत चुका, एक नई पीढ़ी जवान हो गई है. लेकिन, राजनीति की बिसात पर शह -मात का खेल अभी भी जारी है. अब इसकी तासीर कुछ अलग ही कहानी बंया कर रही है.

खनन और पूजा सिंघल मामले में घिरने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए ये वक़्त मुश्किल और इम्तिहान के दौर से गुज़र रहा है. जिस महागठबंधन के वे अगुआ है. वहां हालात में कुछ बदलाव की बू आ रही है. कांग्रेस विधायक इरफ़ान अंसारी का अवैध बालू खनन पर मुख्यमंत्री को घेरना और राष्ट्रपति चुनाव में आदिवासी उम्मीदवार द्रोपदी मुर्मू को समर्थन करें या न करें के मझधार में फसना. आगे कुआं और पीछे खाई के हालात पैदा कर दिए हैं. ऊपर से उनके करीबियों पर केंद्रीय जाँच एजेंसी की रेड से सीएम की परेशानी बढ़ा दी हैं. इसके साथ खुद भी चुनाव आयोग और अदालत में कथित अनुचित कोयला आवंटन को लेकर दाखिल याचिका में घिरे हुए हैं.
सत्ता के गलियारों में सुगबुगाहट और चर्चा तेज़ पकड़ रही हैं की क्या झारखंड मुक्ति मोर्चा बीजेपी का दामन थामेगी ?और कांग्रेस -आरजेडी से किनारा कर लेगी?. खैर जो चाल-ढाल और सरगर्मिया है. इससे बदलाव की बयार बह सकती है !
इधर, राष्ट्रपति चुनाव में द्रोपदी मुर्मू को वोट करना जेएमएम के लिए मज़बूरी बन गई है. क्योंकि मुर्मू आदिवासी है और हेमंत सोरेन भी आदिवासी है और आदिवासियों की ही राजनीति उनकी बुनियाद है. इसके अलावा द्रोपदी मुर्मू खुद झारखण्ड की राजयपाल भी रह चुकी हैं. ऐसा कहा जा रहा है की द्रोपदी मुर्मू को समर्थन देकर, जेएमएम दिल्ली में बैठी भाजपा सरकार को ख़ुश करना चाहेंगी . खैर आगे क्या होगा, ये तो वक़्त बताएगा. लेकिन, सियासत के शतरंज पर जो चाल चली जा रही है. इसके मोहरे तो इसी की तरफ इशारा कर रहें है.
बीजेपी ने महाराष्ट्र में महाविकास आघाडी की सरकार को जिस तरह तितर -बितर कर दिया और गोवा में कांग्रेस का जो हश्र हो रहा है. इससे ये कहानी झारखण्ड में भी दोहराएगी जाएगी. इससे इंकार नहीं किया जा सकता. बीजेपी कांग्रेस को सत्ता से बेदखल और सत्ता हासिल करने के लिए हर तिकड़म भिड़ायेगी. ये पार्टी की फितरत और उनका इतिहास बताता है.
फिलहाल, वक़्त के घूमते पहिए और झारखण्ड की सियासत को गौर से देखने की जरूरत है…….

