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आईसीएआर-आईआईएबी में नई सुविधाओं का उद्घाटन, 1,500 किसानों ने प्री-रबी किसान गोष्ठी में लिया भाग

Arjun Kumar…..✍️

नामकुम (रांची)। आईसीएआर–भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (आईसीएआर-आईआईएबी), गढ़खटंगा में अनुसूचित जाति उप-योजना (एससीएसपी) एवं जनजातीय उप-योजना (टीएसपी) के तहत प्री-रबी किसान गोष्ठी-सह-कृषि इनपुट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रांची, खूंटी, गुमला एवं रामगढ़ जिले के करीब 1,500 किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों, वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के साथ वैज्ञानिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम से पहले कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट, आईसीएआर के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी. के. यादव, आईसीएआर-आईआईएबी के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित और संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. विजय पाल भदाना के साथ संस्थान की विभिन्न सुविधाओं का अवलोकन किया।
उन्होंने डेयरी फार्म, फसल अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, नेक्स्टजेन ब्रीडिंग सुविधा और एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफएस) इकाई का भ्रमण किया। डेयरी फार्म में उन्हें पशुधन के आनुवंशिक सुधार के लिए भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक की जानकारी दी गई। आईएफएस इकाई में उन्होंने किसानों से संवाद करते हुए एकीकृत कृषि प्रणाली, कृषि अपशिष्ट पुनर्चक्रण और संसाधन-कुशल कृषि पद्धतियों की जानकारी ली। उन्होंने पौधरोपण कार्यक्रम में भी भाग लिया और प्रगतिशील किसानों से संवाद किया।
कार्यक्रम स्थल पर आईसीएआर संस्थानों एवं झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों की ओर से कृषि फसलों, पशुधन एवं डेयरी तकनीक, अनुसंधान उपलब्धियों, कृषि योजनाओं और किसानोन्मुख नवाचारों पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गई।
किसान गोष्ठी में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), एथनो-वेटरिनरी मेडिसिन, डेयरी फार्मिंग, फल फसलों की उत्पादन तकनीक, रबी फसलों में समेकित कीट प्रबंधन, फसल विविधीकरण, एकीकृत कृषि प्रणाली, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, पशुधन आहार प्रबंधन तथा लाख की खेती जैसे विषयों पर जानकारी दी गई।
किसानों के बीच नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, मिनरल मिक्सचर, उन्नत बीज, गेहूं, मटर, सरसों एवं सब्जियों के बीज किट, मिल्क कैन कूलर तथा उच्च उत्पादकता वाली टमाटर एवं बैंगन की बीज किस्मों सहित विभिन्न कृषि एवं पशुधन इनपुट वितरित किए गए। इस दौरान आईसीएआर संस्थानों द्वारा विकसित विभिन्न प्रकाशनों एवं प्रौद्योगिकियों का विमोचन भी किया गया।

किसानों की जरूरत के अनुरूप हो कृषि अनुसंधान

आईसीएआर के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी. के. यादव ने कृषि अनुसंधान को किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने और विकसित तकनीकों को अंतिम किसान तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों के उचित मार्गदर्शन, उनके विकास और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता भी बताई।
आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने पूर्वी भारत में कृषि क्षेत्र में नई क्रांति की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने झारखंड में कृषि अनुसंधान एवं ज्ञान संस्थानों को मजबूत करने, राइस-फैलो इंटेंसिफिकेशन को बढ़ावा देने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप फसलों एवं किस्मों का चयन करने पर जोर दिया।

उन्होंने पशुधन उत्पादकता बढ़ाने तथा अम्लीय मिट्टी और फास्फोरस की कमी जैसी कृषि चुनौतियों के समाधान के लिए अनुसंधान को बढ़ावा देने की बात कही। आगामी रबी मौसम के लिए उचित कृषि योजना बनाने तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया।

आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर

कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने किसानों की भूमिका को रेखांकित करते हुए आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, मूल्य संवर्धन, किसान उत्पादक संगठनों और कृषि विज्ञान केंद्रों को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने मृदा परीक्षण और संतुलित उर्वरक उपयोग की आवश्यकता बताई।
उन्होंने किसानों को अपनी कृषि भूमि के एक हिस्से में प्राकृतिक खेती का प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही नकली बीज, मिलावटी उर्वरक और घटिया कीटनाशकों से किसानों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया।

चार नई सुविधाओं का उद्घाटन

इसके बाद केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आईसीएआर-आईआईएबी की नई सुविधाओं का उद्घाटन किया। इनमें एडमिन-कम-स्कूल भवन, बिरसा मुंडा बहुउद्देशीय सभागार, जयपाल सिंह मुंडा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और नेक्स्टजेन ब्रीडिंग सुविधा शामिल हैं। इसके अलावा नए गेस्ट हाउस की आधारशिला भी रखी गई, जिसकी लागत 119 करोड़ रुपये बताई गई है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता के निधन पर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने झारखंड की प्राकृतिक एवं पारंपरिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय परंपराओं में जल, पौधों और प्रकृति के संरक्षण की गहरी समझ रही है।
उन्होंने कहा कि कृषि की मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए पारंपरिक ज्ञान के साथ वैज्ञानिक एवं तकनीक आधारित कृषि को अपनाना जरूरी है। स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप फसलों और किस्मों का चयन, उन्नत बीजों की उपलब्धता तथा कृषि अनुसंधान से विकसित तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने पर उन्होंने जोर दिया।
उन्होंने एकीकृत कृषि प्रणाली, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और उर्वरकों के उचित उपयोग के प्रति किसानों को जागरूक करने की आवश्यकता बताई। नकली बीज, मिलावटी उर्वरक और घटिया कीटनाशकों पर प्रभावी नियंत्रण तथा किसान कल्याणकारी योजनाओं का लाभ गांव-गांव तक पहुंचाने की बात कही। उन्होंने वैज्ञानिकों के ‘लैब टू लैंड’ प्रयासों की सराहना करते हुए देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में डॉ. आर. रमानी, डॉ. के. के. शर्मा, डॉ. तिलक राज शर्मा और आईसीएआर-आईआईएबी के प्रथम नियमित निदेशक डॉ. अरुणव पटनाायक को संस्थान के विकास एवं योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में आईसीएआर-आईआईएबी के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित ने अतिथियों, किसानों, वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और आयोजन से जुड़े सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के माध्यम से किसान, वैज्ञानिक और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद को मजबूत करने तथा कृषि अनुसंधान एवं नवाचार को किसानों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

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