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सरस्वती शिशु विद्या मंदिर महालीमोरुप में मना राष्ट्रीय शिक्षक दिवस…

सरायकेला – संजय मिश्रा । सरायकेला प्रखंड अंतर्गत महालीमोरुप स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में हर्षोल्लास के साथ राष्ट्रीय शिक्षक दिवस का आयोजन किया गया। जिसमें सर्वप्रथम प्रधानाचार्य योगेश कुमार प्रधान द्वारा डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। उन्होंने अपने संबोधन में गुरु-शिष्य परंपरा का भारतीय संस्कृति, सभ्यता के अनुरूप आचरण कर जीवन पथ पर आगे बढ़ने पर बल देते हुए छात्र-छात्राओं को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दिये। इस अवसर पर स्थानीय समाजसेवी सह भारतीय जीवन बीमा निगम के सलाहकार हेमसागर प्रधान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने छात्र-छात्राओं को अपने आशीर्वचन के रूप में गुरु के महत्व बताया। और समस्त गुरुजनों के प्रति आभार प्रकट करते हुए जीवन पथ पर आगे बढ़ने की बात कही।

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उन्होंने कहा कि किसी भी मुश्किलों से पार पाने के लिए एवं सफल जीवन व्यतीत करने के लिए हमारे जीवन में गुरु का होना अति आवश्यक है। हमें गुरु-शिष्य परंपरा को ईमानदारी पूर्वक निर्वहन करते हुए आगे बढ़ना होगा। कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के शिक्षक देवीदत्त प्रधान ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जन्म जयंती पर उनके जीवन वृतांत का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के प्रखर विद्वान, शिक्षाविद डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का आज जन्मदिवस है। उनके जन्म दिवस को आज संपूर्ण भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।

उन्होंने आगे बताया कि एक समय डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के द्वारा पढ़ाए गए विद्यार्थियों ने अपने गुरु का जन्मदिन मनाने का कार्यक्रम बनाकर उनसे कहे कि हम आपका जन्मदिन मनाना चाह रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि मेरे जन्म दिवस के बजाय मेरे जन्मदिन पर समग्र शिक्षक समुदाय को आदर हेतु “शिक्षक दिवस” के रूप में मनाया जाए तो मुझे अति प्रसन्नता होगी‌। इस बात से छात्र प्रभावित होकर प्रतिवर्ष 5 सितंबर के दिन राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के रूप में पालन करते हुए आ रहे हैं, जबकि अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को मनाया जाता है।

ज्ञात हो डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन सिर्फ शिक्षक ही नहीं बल्कि हमारे देश के सर्वोच्च पद ‘राष्ट्रपति’ के पद पर भी देश को सेवा देकर सुशोभित किए हैं। आज हमें उनके बताए गए मार्ग को अनुपालन करते हुए आगे बढ़ने की आवश्यकता है। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक तपन कैवर्त, शिक्षिकाएं एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। अंत में कार्यक्रम का समापन शांति मंत्र के साथ किया गया।