Advertisements
Spread the love

सर्परक्षक टीम की बहादुरी, सिस्टम से नहीं मिला साथ

Advertisements

“जहां सांपों का रिस्क है, वहां एंट्री फिक्स है”

 संवाददाता : दीप सागर

जमशेदपुर । “जहां सांपों का रिस्क है, वहां हमारी टीम की एंट्री फिक्स है”—यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है, जिसे मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव उर्फ ‘छोटू स्नेक ब्वॉय’ और उनकी सर्परक्षक टीम पूरे समर्पण के साथ निभा रही है। यह टीम न सिर्फ इंसानों को सांपों से बचाती है, बल्कि सांपों को भी इंसानों से बचाकर सुरक्षित जंगल में छोड़ती है। दुर्भाग्यवश, यह पूरी सेवा आज भी सरकारी उपेक्षा की शिकार है।

छोटू स्नेक ब्वॉय ने अब तक 5000 से अधिक विषैले और गैर-विषैले सांपों को सुरक्षित रेस्क्यू कर दलमा जंगल में छोड़ा है। यह सेवा वह बीते 15 वर्षों से बिना किसी सरकारी वेतन, मान्यता या सुविधा के निभा रहे हैं। उनका कहना है कि टीम जमशेदपुर के हर क्षेत्र में तैनात रहती है और चाहे आधी रात हो या बारिश, हर कॉल पर तुरंत पहुंचती है।

छोटू जन-जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से यह भी बताते हैं कि झारखंड में केवल कुछ ही प्रकार के सांप ज़हरीले होते हैं, जबकि अधिकांश सांप हानिरहित होते हैं। अज्ञानता के कारण लोग अक्सर उन्हें मार देते हैं, जिससे न सिर्फ सांप मारे जाते हैं बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र भी प्रभावित होता है। छोटू और उनकी टीम ऐसे सांपों को सुरक्षित पकड़कर वन क्षेत्र में छोड़ती है जिससे प्राकृतिक संतुलन बना रहे।

जमशेदपुर के टेल्को, गोविंदपुर, घोड़ा बांधा, मानगो, कदमा, सोनारी और डिमना जैसे इलाके सांपों के लिहाज़ से संवेदनशील माने जाते हैं। बरसात के मौसम में यहां सांप निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। टीम लोगों से अपील करती है कि घर के चारों ओर मिट्टी का तेल, ब्लैक फिनाइल और पानी का मिश्रण छिड़कें, घर के आसपास सफाई रखें और जूते-चप्पल पहनने से पहले ध्यान से देखें।

कोरोना महामारी के समय, जब पूरे देश में लॉकडाउन था और अस्पतालों तक पहुंचना मुश्किल हो गया था, तब भी छोटू और उनकी टीम ने अपनी सेवाएं जारी रखीं। उन्होंने मरीजों को स्कूटी से अस्पताल पहुंचाया और स्वयं पीपीई किट खरीदी। उस संकट काल में भी उन्होंने कई लोगों की जान बचाई।

छोटू सांपों के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करते हुए बताते हैं कि सांप पर्यावरण के लिए बेहद उपयोगी हैं। वे खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले चूहों को खाते हैं, जिससे अनाज की रक्षा होती है। इस तरह सांप अप्रत्यक्ष रूप से किसानों के मित्र हैं।

हालांकि, इतने वर्षों की सेवा के बावजूद आज तक छोटू और उनकी टीम को कोई सरकारी मान्यता, पहचान पत्र या आर्थिक सहायता नहीं मिली है। ट्रैफिक पुलिस अक्सर उन्हें रास्ते में रोक देती है, जिससे वे समय पर रेस्क्यू नहीं कर पाते। उन्होंने कई बार जिला प्रशासन, वन विभाग, ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम से गुहार लगाई है, लेकिन हर बार फाइलें दफ्तरों में धूल फांकती रही हैं।

टीम में महिलाओं की भागीदारी भी प्रेरणादायक है। रजनी लहाल और एक अन्य महिला सदस्य आज टीम की सक्रिय सदस्य और प्रशिक्षक हैं। रजनी कहती हैं कि सांपों से डरने की नहीं, समझने की जरूरत है और महिलाएं हर क्षेत्र में सक्षम हैं—बस उन्हें अवसर मिलना चाहिए।

सर्परक्षक टीम में आठ सदस्य हैं, जिनमें छह पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं। हर सदस्य को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं—कोई फील्ड में रिस्पॉन्स करता है, कोई तकनीकी सहयोग देता है, तो कोई रिकॉर्डिंग और वन विभाग से समन्वय की भूमिका निभाता है। टीम का नेतृत्व छोटू स्नेक ब्वॉय करते हैं, जो अपने जुनून और सेवा भावना से टीम को प्रेरित करते हैं।

छोटू का कहना है कि वे पुरस्कार या सम्मान नहीं चाहते, बस इतना चाहते हैं कि उनका काम बाधित न हो। उन्हें एक सरकारी पहचान मिले ताकि ट्रैफिक पुलिस या अन्य विभाग उन्हें अनावश्यक न रोके। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार ऐसे कॉल आते हैं जब बच्चे सांपों के पास पहुंच जाते हैं। अगर टीम 10 मिनट भी देर से पहुंचती है, तो जान जाने का खतरा बना रहता है।

छोटू स्नेक ब्वॉय का व्हाट्सएप नंबर 9006138085 और 8210799352 है, जिस पर लोग सीधे उन्हें संपर्क कर सकते हैं। वे स्कूल, कॉलेज और पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाना चाहते हैं ताकि लोग सांपों से डरने के बजाय समझदारी से व्यवहार करें और उन्हें मारने के बजाय सुरक्षित रेस्क्यू कराएं।

यह समय है जब समाज और प्रशासन को मिलकर ऐसे निःस्वार्थ सेवाभावी कर्मवीरों को न सिर्फ सम्मान देना चाहिए, बल्कि उन्हें सुरक्षा, पहचान और संसाधनों के साथ सहयोग भी करना चाहिए। क्योंकि जहां सांपों का रिस्क है, वहां इनकी एंट्री फिक्स है—लेकिन क्या सिस्टम की एंट्री भी कभी इनकी जिंदगी में होगी?

You missed