Advertisements
Spread the love

पथराई आंखों में कैद 30 साल का दर्द : “अब मैं घर नहीं जाना चाहती…” कहते फफक पड़ी बुज़ुर्ग महिला

Advertisements

Arjun Kumar Pramanik……✍️

रांची ।  झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष सुजित नारायण प्रसाद के दिशा-निर्देश तथा सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना एवं न्यायायुक्त, रांची अनिल कुमार मिश्रा-1 के मार्गदर्शन में डालसा, रांची के सचिव राकेश रौशन ने दिनांक 19.02.2026 को सीआईपी, कांके, रांची का निरीक्षण किया। निरीक्षण टीम में डालसा सचिव राकेश रौशन, सीआईपी के निदेशक बी.के. चौधरी, एलएडीसी डिप्टी राजेश कुमार सिन्हा तथा न्यायमित्र भारती शाहदेव शामिल थे। निरीक्षण के क्रम में सर्वप्रथम डालसा सचिव ने सीआईपी के निदेशक से मुलाकात कर संस्थान की व्यवस्थाओं एवं समस्याओं की जानकारी ली। इसके पश्चात विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान ऐसे 47 मानसिक रोगी पाए गए, जो चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ हो चुके हैं, किंतु उनके परिजन उन्हें अपने घर ले जाने के लिए तैयार नहीं हैं।
निरीक्षण के दौरान एक महिला मिलीं, जो लगभग 30 वर्षों से सीआईपी में भर्ती हैं। बातचीत के क्रम में उन्होंने हाथ जोड़कर कहा, “अब मैं अपने घर नहीं जाना चाहती हूं। जब समय था तब मेरे परिवार वाले मुझे लेने नहीं आए। अब मैं बूढ़ी हो चुकी हूं। मां-बाप सभी थे, लेकिन कभी मुझे देखने नहीं आए। अब मैं यहीं रहना चाहती हूं।” यह कहते हुए वे भावुक हो उठीं।
एक अन्य महिला के संबंध में जानकारी मिली कि उन्हें 30 वर्ष की आयु में उनके परिजनों द्वारा अस्पताल में भर्ती कर छोड़ दिया गया था। वर्तमान में उनकी आयु लगभग 80 वर्ष हो चुकी है। वे आज भी अपने परिवार के आने और अपने साथ ले जाने की प्रतीक्षा कर रही हैं। निरीक्षण के उपरांत सचिव ने सभी 47 मानसिक रोगियों का विस्तृत विवरण प्राप्त किया तथा सीआईपी निदेशक को निर्देश दिया कि काउंसलिंग के माध्यम से रोगियों के परिजनों से संपर्क स्थापित कर उन्हें पुनर्वास हेतु प्रेरित किया जाए। जो रोगी पूर्णतः स्वस्थ हो चुके हैं, उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने एवं समुचित पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

You missed