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डुमुरिया (घाटशिला) : झारखंड के सिमांचल पहाड़ी में बसे ‘लखाईडिह’ आयूर्वेद और हर्बल खेती…

रिपोर्ट : प्रभाकर @ बिल्लू 

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पुरा विश्व प्रदुषण, हाई ब्रीड उत्पादों से घिरने लगा है। जिससे लोगों के स्वास्थ्य में बुरा असर पड़ रहा है। नित दिन नये-नये बिमारियों का आमदनी हो रहा है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन भी इस दिशा में अवश्य ही चिंतित है। इन प्रकोपों से बचने के लिए अब आयुर्वेदिक तरीकों को अपनाया जाने लगा है । रासायनिक खाद सामग्रियों के जगह जैविक खाद्य पदार्थों को अहमियत मिलने लगी है । इस दिशा में झारखंड राज्य के पूर्वी सिंहभूम जिले के उड़िसा के तराई में पहाड़ी पर बसे एक छोटा सा गांव नाम है “लखाईडिह” का ग्राम प्रधान कान्हू राम टुडू ने भी कमर बांधे दिखाई देने लगा है। बातों को विस्तार से जानने के लिए चलिए आगे चलाते हैं।

पूर्वी सिंहभूम जिला के डुमरिया प्रखंड के लखाईडिह के ग्राम प्रधान कान्हू राम टुडू ने नई दिल्ली में आयुर्वेद एवं हर्बल खेती के क्षेत्र में कार्यरत प्रतिष्ठित विशेषज्ञों और उद्यमियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य झारखंड, ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती आदिवासी बहुल क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध बहुमूल्य जड़ी-बूटियों की संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना था।

बैठक के दौरान ग्राम प्रधान कान्हू राम टुडू ने स्पष्ट रूप से कहा कि, जिस प्रकार अन्य राज्यों में “हर्बल क्रांति” ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है, उसी प्रकार झारखंड भी प्राकृतिक संपदाओं के बल पर आत्मनिर्भरता की मिसाल बन सकता है। उन्होंने बताया कि एक समय नक्सल प्रभावित “रेड जोन” के रूप में पहचाना जाने वाला यह इलाका आज पूरी तरह नक्सल मुक्त है और विकास के नए अवसरों के तलास मे है।

उन्होंने कहा, इस क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों की कोई कमी नहीं है। यदि योजनाबद्ध तरीके से हर्बल खेती, प्रसंस्करण एवं विपणन की व्यवस्था विकसित की जाए, तो यहां के आदिवासी और मूलवासी समुदायों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित किया जा सकता है। इससे न केवल आर्थिक सशक्तिकरण होगा, बल्कि बेरोजगारी के लिए हो रहे नियमित पलायन पर भी रोक लगेगी।

इस अवसर पर डॉ. कर्ण राजहंस, जो आयुर्वेद श्री प्राइवेट इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (एमडी) हैं, ने भी अपनी सहमति और रुचि व्यक्त की। डॉ. राजहंस ने गुजरात, हिमाचल प्रदेश तथा असम सहित कई राज्यों में आयुर्वेद एवं हर्बल उद्योग के क्षेत्र में सफल कार्य किए हैं।

प्रधान कान्हू राम टुडू ने डॉ. राजहंस एवं हर्बल उत्पादों के आयात-निर्यात से जुड़े व्यवसायियों से लखाईडीह और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा करने का आग्रह किया, ताकि जमीनी स्तर पर संभावनाओं को समझा जा सके। 

बैठक में, दिनेश जैन, जितेंद्र सख्या, संतोष कुमार सरस, इंदर जीत सेहरावत, भैरव महाराज सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

यह पहल न केवल झारखंड में हर्बल उद्योग की नई शुरुआत का संकेत है, बल्कि यह आदिवासी क्षेत्रों के समग्र विकास, आत्मनिर्भरता और हरित क्रांति के दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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