Advertisements
Spread the love

चाकुलिया: ‘नहाय-खाय’ के साथ हुई चार दिवसीय चैती छठ महापर्व की शुरुआत, श्रद्धा में डूबा शहर

संवाददाता: विश्वकर्मा सिंह
आस्था और लोकपरंपरा का महान पर्व चैती छठ रविवार को ‘नहाय-खाय’ के साथ श्रद्धा और विधि-विधान के बीच शुरू हो गया. चार दिनों तक चलने वाले इस कठिन और पवित्र अनुष्ठान के पहले दिन व्रतियों ने आत्मशुद्धि, सात्विकता और सूर्य उपासना का संकल्प लिया. शहर के विभिन्न इलाकों में सुबह से ही छठी मइया के पारंपरिक गीतों की गूंज सुनाई देने लगी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा. इस दौरान नहाय-खाय के अवसर पर प्रमुख घाटों, तालाबों और जलाशयों में व्रतियों ने पवित्र स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया. स्नान के बाद व्रतियों ने घरों में पूरी शुद्धता के साथ प्रसाद तैयार किया. पूजा-अर्चना के पश्चात अरवा चावल, सेंधा नमक की चने की दाल, कद्दू की सब्जी और आंवला की चटनी का प्रसाद ग्रहण कर चार दिवसीय निर्जला व्रत का संकल्प लिया गया.

Advertisements

 

पहला दिनः नहाय-खाय से होती है शुरुआत

पहले दिन व्रती स्नान कर शुद्धता के साथ व्रत की शुरुआत करते हैं. इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है, जिसमें कद्दू की सब्जी और चावल का विशेष महत्व होता है। इसी के साथ पूजा आरंभ हो जाता है.

दूसरा दिनः खरना पर विशेष प्रसाद

दूसरे दिन पूरे दिन उपवास रखने के बाद शाम को पूजा की जाती है. इस दौरान गुड़ से बनी खीर, घी वाली रोटी और केला भगवान को अर्पित किए जाते हैं. खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत रखती है.

तीसरा दिनः डूबते सूर्य को अर्घ्य

तीसरे दिन व्रती शाम के समय अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देते हैं. यह अनुष्ठान नदी, तालाब या घर की छत पर किया जाता है, जहां विशेष रुप से पूजा की व्यवस्था की जाती है.

चौथा दिनः उगते सूर्य के साथ व्रत पूर्ण

अंतिम दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है. इसी के साथ व्रती अपना व्रत समाप्त करते हैं और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं.

You missed