
दवा कारोबारियों का बड़ा आंदोलन, ई-फार्मेसी पर रोक की मांग को लेकर बाजार ठप

रिपोर्ट – जगबंधु महतो
आदित्यपुर । ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बुधवार को देशभर के दवा व्यवसायियों ने 24 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल की। इस दौरान कई राज्यों में मेडिकल दुकानें बंद रहीं, जिससे आम लोगों को दवाइयों की खरीद में परेशानी का सामना करना पड़ा। हड़ताल का आह्वान दवा व्यापारियों के विभिन्न संगठनों द्वारा किया गया था, जिनका कहना है कि बिना उचित निगरानी के ऑनलाइन दवाओं की बिक्री मरीजों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है।
दवा व्यवसायियों का आरोप है कि ई-फार्मेसी कंपनियां नियमों का उल्लंघन करते हुए बिना डॉक्टर की पर्ची के भी दवाइयां उपलब्ध करा रही हैं। इससे नकली दवाओं के कारोबार को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। व्यापारियों ने सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियंत्रण और स्पष्ट नीति लागू करने की मांग की है।
हड़ताल के कारण कई शहरों में मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद रहे, हालांकि अस्पतालों के अंदर संचालित दवा दुकानें और आपातकालीन सेवाओं को कुछ स्थानों पर छूट दी गई। मरीजों और उनके परिजनों को आवश्यक दवाइयों के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। विशेष रूप से बुजुर्ग और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को अधिक परेशानी हुई।
दवा विक्रेताओं का कहना है कि पारंपरिक मेडिकल दुकानों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारी छूट देकर ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं, जिससे छोटे और मध्यम स्तर के दवा दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। उनका दावा है कि यदि यही स्थिति रही तो हजारों छोटे मेडिकल स्टोर बंद होने की कगार पर पहुंच जाएंगे।
व्यापारिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वहीं, आम लोगों ने सरकार से ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है, जिससे मरीजों को दवाओं की उपलब्धता भी बनी रहे और नियमों का पालन भी सुनिश्चित हो सके।

