Advertisements
Spread the love

डुमरिया : कौन कहता है नारी आसमां छु नहीं सकती ? मन में चाह और सही हाथ की जरुरत होती है…

प्रभाकर कुमार… ✍️

Advertisements

कौन कहता है नारी आसमां को छु नहीं सकती, जरूरत होती है बड़ी चाह और साथ देने वाले हाथों की।

डुमरिया प्रखंड की तीन जनजातीय छात्रा पहली बार झारखंड और उड़ीसा के तराई में बसे जंगल और पहाड़ों से घिरा हुआ लखाईडीह गांव से निकल कर जमशेदपुर के सारदामणि हाई स्कूल में अपना नामांकन करवाया। 

सुदूरवर्ती और पहाड़ी क्षेत्र लाखाईडीह की तीन जनजातीय छात्राओं का जमशेदपुर स्थित सारदामणि हाई स्कूल में नवमी कक्षा में नामांकन कराया गया है। नामांकित छात्राओं में दिगी टुडू, गंगा मारंडी और सिनगो टुडू शामिल हैं। अब ये छात्राएं शहर के बेहतर शैक्षणिक माहौल में पढ़ाई करने के लिए कदम आगे बढ़ाकर, ज़िन्दगी संवारने चली। 

 

ग्राम प्रधान कान्हु राम टुडू ने बताया कि भारत सरकार के जल शक्ति मिशन के अपर सचिव के. के. सोन के लाखाईडीह दौरे के दौरान बेहतर शिक्षा के लिए इन छात्राओं के नाम तत्कालीन उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी को सौंपे गए थे। इसके बाद छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए पहल शुरू की गई।
उन्होंने बताया कि पूर्व उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के तबादले के बाद भी इस पहल को आगे बढ़ाने में निजी सचिव ललन कुमार और डीडीसी नागेंद्र पासवान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। छात्राओं के रहने की व्यवस्था साकची स्थित कार्यकारी महिला छात्रावास में कराई गई, जहां 1700 रुपये की जगह मात्र 500 रुपये में कमरा उपलब्ध कराया गया।

ग्राम प्रधान ने कहा कि दूर-दराज और आर्थिक रूप से कमजोर जनजातीय परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराना बड़ी उपलब्धि है। इससे क्षेत्र के अन्य बच्चों और अभिभावकों में भी शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

डीडीसी नागेंद्र पासवान ने कहा कि ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इन छात्राओं का प्रतिष्ठित विद्यालय में नामांकन उनके बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आगे भी जरूरतमंद विद्यार्थियों को हर संभव सहायता दी जाएगी।

डुमरिया जैसे सुदूरवर्ती क्षेत्र की छात्राओं का शहर के प्रतिष्ठित विद्यालय में नामांकन शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है। यह प्रशासन और समाज के सामूहिक प्रयास का बेहतर उदाहरण है, जिससे क्षेत्र के अन्य बच्चों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। साथ ही बिहड़ क्षेत्रों में रहने वाली बालिकाओं के लिए एक “माइल का स्टोन” साबित हो सकती है।

You missed