सोमवार की रात से कोहरे की चादर में लिपटी रही सरायकेला…
घने कुहासे के बीच
मंगलवार की सुबह
ओस की बरसात का
नजारा दिखा….
कवियों की कल्पनाओं में मोतियों के बूंद सी चमकती
पेड़ की पत्तियों पर ओस
की ये बूंदे अनमोल सी दिखी……
की ये बूंदे अनमोल सी दिखी……
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