Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Spread the love
  1. बहरागोड़ा : जाति, धर्म, वर्ग, लिंग भेद से ऊपर उठकर ग्राम सभा काम करें: मृत्युंजय महतो

# रिक्त ग्राम प्रधान पद को जल्द भरे : अरुण बारिक 

Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements

२४ अगस्त’ २०२६ : बहरागोड़ा दादू कम्प्लेक्स में पारंपरिक ग्राम प्रधान संघ की सांगठनिक बैठक ग्राम प्रधान भवतरण बट्टवाल के अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक को सम्बोधित करते हुए पारंपरिक ग्राम प्रधान संघ के जिला महासचिव मृत्युंजय महतो ने कि जाति, धर्म , वर्ग , लिंग भेदभाव से उपर उठकर ग्राम सभा को मजबूत बनायें, पेसा सम्बन्धी कार्यक्रमों में सबका अधिकार सबका सम्मान होना चाहिए।

गांव की परम्परागत स्वशासन व्यवस्था की विरासत को संरक्षित करने की आवश्यकता है। जिलाध्यक्ष अरूण बारिक ने बैठक में सभी ग्राम प्रधान को एक मंच पर आने का आह्वान किया और कहा कि पेसा नियमावली लागू तो हो गया है, परन्तु अधिकारियों के उदासीनता के कारण सफल अनुपालन नहीं हो रहा है। ग्राम सभा की बैंक खाता खोला नहीं जा रहा है। दर्जनों ग्राम प्रधानों का वर्षों पहले निधन हो गया है। वैसे रिक्त पद पर ग्राम सभा द्वारा उसके उत्तराधिकारी पुत्र को रीति रिवाज के अनुसार चुनें गये है, उसे सम्बोधित अधिकारी द्वारा स्वीकृती देने में आनाकानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि पेसा नियमावली में स्पष्ट उल्लेख है कि एक माह के भीतर नये ग्राम प्रधान का चयन कर लेना है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों का उदासीनता से पारम्परिक स्वशासन व्यवस्था पर अड़चने आ रही है। कुछ अधिकारी भेदभाव कर रहे हैं । पेसा सम्बोधित कार्यक्रमों में ग्राम प्रधानों को उपेक्षा कर फर्जी ग्राम प्रधानों को महत्व दिया जा रहा है। वैसे लोग गांव में विवाद उत्पन्न कर रहे हैं। वैसे कोई ऐसे लोग हैं जो स्वयंभू पारंपरिक अगुवा बने हुए हैं। उन्होंने सरकारी प्रवधान अनुसार सभी मान्यता प्राप्त ग्राम प्रधान को परिचय पत्र एवं प्रमाण पत्र देने का मांग को दुहराया है।

बहरागोड़ा, गुड़ाबांधा, धालभूमगढ़, घाटशिला,डुमरिया प्रखंड के ग्राम प्रधानों का अब तक परिचय पत्र भी नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा है कि अधिकारियों को भेदभाव पूर्ण रवैया से उपर उठकर नियम अनुसार पहल करना चाहिए। पेसा सम्बोधित कार्यक्रमों में भी भेदभाव किया गया है।सरकार के निर्देशों का सही ढंग से अनुपालन नहीं हो रहा है। अगर वही हाल रहा तो पेसा का उद्देश्य धरातल पर आने में वर्षों लग जाएगा। उन्होंने कहा अब समय का तकाजा है सभी ग्राम प्रधानों को एक मंच पर आकर पेसा कानून को मजबूत से लागू करें। उन्होंने कहा कि गांव की परम्परा, रीति रिवाज, संस्कृती की विरासत को संरक्षित करने के लिए सामुहिक प्रयास होना चाहिए, तभी अनुसूचित क्षेत्र के राजस्व ग्राम की स्व-शासन व्यवस्था सुचारू रूप से संचालन होगा। उन्होंने कहा कुछ लोग पेसा नियमावली को लेकर गांव में भ्रम फैला रहे हैं। सदी से चली आ रही आपसी भाईचारा को हमें संवार कर रखना है। किसी के बहकावे में ना पड़े। गांव की परम्परागत स्वशासन व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए एक ओर पहल की आवश्यकता है।

मौके पर जिला उपाध्यक्ष हेमंत भकत (पोटका) बिंदावन दास, पटमदा प्रखंड अध्यक्ष)हरिप्रसाद दे(बहरागोड़ा प्रखंड अध्यक्ष), तरूण प्रधान (बहरागोड़ा पूर्वांचल अध्यक्ष), गणेश हांसदा( बहरागोड़ा पूर्वांचल सचिव), देवाशीष कुईला (बहरागोड़ा सचिव ) रविन्द्र साव, सपत गोराई, अरविंद प्रहराज सहित काफी संख्या में ग्राम प्रधान उपस्थित थे।

Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements

You missed