चाकुलिया: कुड़माली को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मुहिम तेज, अमित शाह से मिले सांसद बिद्युत महतो समेत चार सांसद
संवाददाता: विश्वकर्मा सिंह
कुड़माली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर जमशेदपुर के सांसद बिद्युत बरण महतो सहित कुड़माली भाषी सांसदों ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. सांसदों ने गृह मंत्री को मांग-पत्र सौंपकर कुड़माली को संवैधानिक मान्यता देने तथा इस दिशा में आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आग्रह किया. सांसदों ने कहा कि कुड़माली पश्चिम बंगाल के जंगलमहल क्षेत्र के साथ-साथ झारखंड और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में व्यापक रूप से बोली और समझी जाती है. यह भाषा सदियों से इन क्षेत्रों की सामाजिक, सांस्कृतिक और लोक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा रही है. कुड़माली भाषी समुदाय की महत्वपूर्ण आबादी पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर के अलावा झारखंड के रांची, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, हजारीबाग, गिरिडीह, जमशेदपुर एवं सरायकेला -खरसावां तथा ओडिशा के मयूरभंज, क्योंझर और सुंदरगढ़ क्षेत्रों में है.


सांसदों ने कहा कि कुड़माली महज किसी एक क्षेत्र की बोली नहीं, बल्कि समृद्ध लोक-साहित्य, गीत, कविता, लोककथाओं और मौखिक परंपराओं वाली एक जीवंत भाषा है. झुमर, टुसू, करम और छऊ जैसी क्षेत्रीय सांस्कृतिक परंपराओं से भी इसका गहरा संबंध है. मांग-पत्र में कहा गया कि कुड़माली को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने से भाषा एवं साहित्य के संरक्षण और विकास को बढ़ावा मिलेगा. इसके साथ ही शैक्षणिक एवं शोध कार्यों को प्रोत्साहन मिलेगा और कुड़माली भाषी समाज की भाषायी एवं सांस्कृतिक पहचान को संवैधानिक सम्मान प्राप्त होगा. सांसदों ने कहा कि यह केवल भाषा को मान्यता देने का विषय नहीं, बल्कि पुरुलिया, जंगलमहल तथा झारखंड और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों की सांस्कृतिक पहचान, परंपरा और विरासत के सम्मान से जुड़ा मुद्दा है. कुड़माली को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग संसद सहित विभिन्न मंचों पर लंबे समय से उठाई जाती रही है.

गृह मंत्री अमित शाह ने सांसदों की बातों को गंभीरता से सुना. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार भारतीय भाषाओं और साहित्य के विकास के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने बताया कि कुड़माली सहित कुछ अन्य भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का मामला लंबित है और सरकार इस दिशा में आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी.

इस मौके पर पुरुलिया के सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो, गिरिडीह के सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी, राज्यसभा सांसद खीरू महतो, अजीत प्रसाद महतो सहित अन्य लोग उपस्थित थे.

