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मुसाबनी : सुचना के अधिकार को शायद सरकारी तंत्र हल्के में लेने लगे हैं ?

दीपक नाग … ✍️

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सुचना के अधिकार का जबाब देना सरकारी दफ्तरों ने शायद हल्के में लेने लगें हैं ? ऐसा ही एक वाक्य झारखंड राज्य के पूर्वी सिंहभूम जिले अंतर्गत मुसाबनी प्रखंड कार्यालय का प्रकाश में आया है।

 झारखंड मानवाधिकार संघ के केंद्रीय अध्यक्ष दिनेश कुमार शर्मा उर्फ दिनेश किनु ने मुसाबनी ग्रेस यूनियन चर्च के समीप बना नेताजी सुभाष पार्क के संबंध में कुछ तथ्यों के जानकारी के लिए मुसाबनी प्रखंड विकास पदाधिकारी को सुचना का अधिकार 2005 के तहत 30 मार्च’ 2026 के डाक के माध्यम से आवेदन भेजा गया था । नियमत इस आधार पर 30 दिनों के अंदर आवेदक को इसका जबाब विभागीय स्तर से उपलब्ध करवाना होता है। 

मुसाबनी प्रखंड कार्यालय से मिला पत्र 👆

इस संबध में झारखंड मानवाधिकार संघ के केंद्रीय अध्यक्ष दिनेश किनु ने बताया, मुसाबनी प्रखंड विकास पदाधिकारी के कार्यालय से लगभग चार महिने बाद 27 जुलाई’ 2026 कै डाक के द्वारा एक पत्र प्राप्त हुआ। जिसमे यह बताया गया है कि, संबंधित क्षेत्र के पंचायत सचिव के माध्यम से यह निर्माण कार्य विधायक निधि से करवाई गई है और इसके देख-रेख की जिम्मेदारी जिला स्तरीय है। इस के अतिरिक्त और किसी प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया गया। 

सुचना का अधिकार लेकर👆

दिनेश किनु ने कहा, चुंकि , मुसाबनी प्रखंड विकास पदाधिकारी कार्यालय में इस योजना की जानकारी नहीं थी तो, RTI के धारा 6 (3) तहत मुसाबनी प्रखंड विकास पदाधिकारी कार्यालय को पांच दिनों के अंदर संबंधित विभाग को यह आवेदन अग्रसरित करना होता है ताकि, आवेदक को निर्धारित समय सीमा में जानकारी उपलब्ध करवाया जा सके। इसके अतिरिक्त इसकी सुचना आवेदन कर्ता को भी तुरंत देनी होती है। जब कि, यहां संबंधित कार्यालय से ऐसा नहीं किया गया है।

दिनेश किनु बताया कि, ऐसी गैर जिम्मेदारी कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए सरकार को सचेत होने की जरूरत है। क्यों कि, सरकारी राशि से लाखों करोड़ों रुपए के योजना कार्यों करवाया जाता है, पर योजना संबंधित जानकारी सुची पट विभागों द्वारा नहीं लगाया जाना वैसे ही भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

बता दूं कि, मुसाबनी के किसी भी विपक्षी राजनीतिक दल इस मामले पर ऊंगली तो दूर की बात है, एक बार भी आवाज अब तक नहीं उठाया है। ऐसा लगता है जैसे मुसाबनी प्रखंड में विपक्ष विहिन क्षेत्र है ?

गौर करने वाली बात यह है कि, लगभग तीन-चार साल पहले मुसाबनी में नेताजी सुभाष पार्क के नाम से लाखों रुपए की लागत से कार्य सुरु किया गया था जो आज तक पुरा हो न सका। जानकारों का मानना है कि, इसी वजह से न तो अधिकारिक रुप से योजना कार्य समाप्त न तो सका और न ही इस पार्क का उद्घाटन हो सका।

देखा जाए मैं निर्माण कार्य जिस विभाग के अधिनस्थ उस विभाग के तत्कालीन संबंधित अधिकारीयों को प्रश्नों के कटघरे मे खड़े है। योजना कार्य आरंभ होते ही निर्माण कार्य संबंधित सुचना पट लगा दिया होता तो आज RTI के कार्य शैली का इस तरह अवहेलना न हुआ होता। 

दिनेश किनु 

बहरहाल, मामला संगीन है और आम लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ हुआ है। क्यों कि, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का लोहा पुरा विश्व मानता है और उन्हीं के प्रतिष्ठा पर छेड़छाड़ करने की जिम्मेदारी विभाग कोशिश की है।

अब देखना है कि, झारखंड मानवाधिकार संघ के अध्यक्ष सच्चाई को उजागर करने में कितना सार्थक होता है ? परिणाम भविष्य के गर्भ में है ?

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