सिंहभूम कॉलेज परिसर में मनाया गया संताली भाषा विजय
दिवस, सरकार से की संताली भाषा को सभी पाठ्यक्रमों में
सामिल कराने की मांग…
चांडिल (परमेश्वर साव) : सिंहभूम महाविद्यालय चांडिल परिसर में संताली भाषा के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू जी तस्वीर पर माल्यार्पण कर संताली भाषा दिवस मनाया गया उपस्थित सभी छात्रों ने बारी – बारी से पं.रघुनाथ मुर्मू जी के तस्वीर पर माल्यार्पण किया गया। ज्ञात हो कि भारत सहित विश्वकी अन्य भाषा की पुस्तकें भी संताली में अनुवाद हो रही है।आज पहले से ज्यादा संताली की साहित्य गतिविधियां हो रही है।संताल समुदाय के लोग 22 दिसंबर को भाषा विजय दिवस के रूप में मनाते हैं जबसे संताली भाषा का विकास संविधान की आठवीं अनुसूचि में शामिल किए जाने के बाद ही तेजी से हुआ। इसके बाद कई विधाओं में संताली साहित्य का प्रकाशन होने लगा। साहित्य अकादमी पुरस्कार, युवा पुरस्कार, बाल पुरस्कार भी प्रकाशन किया गया। इससे मानो संताल समुदाय के सुधिजन, कविजनों में नई ऊर्जा का संचार हुआ।
यह बातें सिंहभूम कालेज चांडिल छात्र संघ छात्र नेता सुदामा हेम्ब्रम ने कहा कि भारत सहित विश्व की अन्य भाषा की पुस्तकें भी संताली में अनुवाद होकर पहुंच रही है। आज पहले से ज्यादा संताली की साहित्य गतिविधियां हो रही हैं। लेखकों को प्रोत्साहित किया जाने लगा है। संताल समुदाय के लोग 22 दिसंबर को पारसी जितकार माहा अर्थात भाषा विजय दिवस के रूप में मनाते हैं। वस्तुत: यह दिन संताली भावनाओं के सम्मान का दिन है। केंद्र व राज्य सरकारों को देना चाहिए ध्यान पारसी माहा दिसवस पर अखिल भाषा के विकास में सभी सरकारों को ध्यान देना चाहिए। आठवीं अनुसूचि में शामिल होने के बाद संताली भाषा का विकास सही ढंग से नहीं हो पाया है। विश्व में भी इस भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी अपनी लिपि है, जो ओलचिकी के नाम से जानी जाती है। इस लिपि की यह खूबी है कि किसी भी भाषा को उच्चारण के अनुसार लिखा जा सकता है। संताल समाज 22 दिसंबर को पारसी माहा के रूप में मनाते हैं। आने वाले दिनों में इसके विकास के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार दोनों को तत्पर रहना होगा।
इसे स्कूली पाठ्यक्रमों में भी लागू करना होगा। यह भी कहा गया संताली भाषा को 22 दिसंबर 2003 को भारतीय संविधान में आठवीं अनुसूची में शामिल कराया गया था, एंव संताली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए अनेक लंबे संघर्ष करना पड़ा था, संताली भाषा के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू ने संताली लिपि को जन्म दिया था संताली भाषा की पढ़ाई हर स्कूलों -कालेजो में हो। इस अवसर पर वरिष्ठ छात्र कृष्णा मिंज, छात्रनायक शंकर हांसदा,सोमचांद टुडू, उमेश सिंह मुंडा,नारायण किस्कू, धनीराम हेम्बम,मंगल सिंह मुण्डा, दीपक मांझी आदि सैकड़ों कॉलेज के विद्यार्थी उपस्थित थे।
