दलमा सफारी योजना का 85 गांव के ग्रामीणों कर रहे हैं विरोध, दलमा बचाओ समिति के बैनर तले अन्दोलन की तैयारी प्रारंभ…
ग्रामीणों कहा दलमा आदिवासीयों का धार्मिक स्थल और पूर्वजों की धरोहर है व्यवसायीकरण नहीं होने दिया जाएगा…
चांडिल (कल्याण पात्रा) दलमा वन्य आश्रयणी के व्यवसायीकरण निति को लेकर कान्दरबेड़ा एन एच 33 फुटवॉल मैदान में दलमा बचाओ समिति के बैनर तले दलमा क्षेत्र के प्रभावित 85 गांव के जनप्रतिनिधि और सैकड़ों ग्रामीणों ने दलमा सफारी योजना का विरोध में बैठक आयोजित किया और योजना को वापस लेने को लेकर ग्रामीण वन विभा्रग के विरोध में सड़क पर उतरने की चेतावनी दी है ।
दलमा वन्य आश्रयणी झारखंड के हाथियों का आश्रयणी माना जाता है जहां राज्य ही नहीं देश विदेशों से पर्यटक आते है । उनके सुविधा के लिए वन विभाग ने दलमा सफारी योजना को ला रही है । जिसको लेकर विगत 10 अगस्त को टेन्डर की प्रक्रिया किया गया है । साथ ही प्रवेश द्वार पर प्रवेश निषेध किया गया है चार पहिया वाहनों की शुल्क को भी बढ़ा 600रू कर दिया गया है और कई सख्त कानून लागू किया जा रहा है । जिससे लेकर दलमा से प्रभावित 84 गांव के लोग वन विभाग के सफारी योजना का विरोध कर रहे है । स्थानीय लोगों का कहना है कि दलमा हम आदिवासीयों का धरोहर है धर्मिक और रोजी रोटी का साधन है । जिसका व्यवसयीककरण नहीं होने दिया जायेगा । जिससे लेकार कान्दरबेड़ा फुटवॉल मैदान में मुखिया, पचायत समिति दलमा इको अध्यक्ष सहित 85 गांव के ग्रामीणों ने दलमा सफारी योजना का विरोध करते हुये वन विभाग को दलमा सफारी को वापस लेने की अपील किया और चेतावनी दी कि योजना वापस नही ली जाती है तो 85 गांव के आदिवासी समुदाय अपने धार्मिक और रोजी रोजगार को लेकर उग्र आन्दोलन के लिए सड़क पर उतरेगें ।
वही वन विभाग के अचिन राणा नाका प्रभारी माकलाकोचा ने बताया की इस योजना से स्थानिय लोगों के रोजी रोजगार पर किसी प्रकार का असर नहीं होगा । यहां के लोग गाईड और चालक के रूप में दलमा में कार्य करेगें । इससे रोजगार बढ़ेगी ।
इस बैठक में मुखिया बिदु मुर्मू, पंचायत समिति माधवी सिंह, पूर्व उप मुखिया मलिन्दर महतो, उप मुखिया प्रदीप महतो, वार्ड मेंबर मलिंदर ओरांग, बाबू राम सोरेन, आनन्द गोराई, बुधु माझी, बर्जन माझी, अंगद सिंह, रवींद्र नाथ सिंह, आकाश महतो, सुब्रतो नाग, दीपक महतो, सन्तोष गिराई, राहुल कुमार आदि सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
