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आदिवासी समाज की 85 महिलाओं का सशक्तिकरण अभियान
उषा मार्टिन चला रहा है तीन रोजगारन्मुख कार्यक्रम
हेडिंक्राॅफ्ट, जूट बैग, ठोंगा और सोहराई का ट्रेनिंग

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रांची/नामकुम । महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने से परिवार में आय वृद्धि और खुशहाली आती है। इस अभियान के तहत उषा मार्टिन गांवों की युवतियों एवं महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का अभियान चला रही है। अभी तक टाटीसिलवे के इर्द गिर्द के गांवों की 85 से अधिक लोगों को चार रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण से जोड़ा गया है। 25 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को जूट बैग, फोल्डर और कागज का ठोंगा बनाने से जोड़ा गया है। इसके अलावा 20 महिलाएं सोहराई पेंटिंग सीख रही है। अनगड़ा प्रखंड की बेरोजगार युवितयों को बांस के हेडिक्राॅफ्ट बनाने के प्रशिक्षण कार्यक्रम से जोड़ा गया है। 20 महिलाओं के समूह को सोहराई पेटिंग सिखायी जा रही है। एक महिला समूह को मछली पालन से जोड़ा गया है।
<span;>हरातू गांव की महिलाओं ने पिछले तीन माह में सोइराई पेटिंग से 40 हजार की आमदनी की है। इन महिलाओं नेे रोशनी स्वयं-सहायता समूह बनायी है। ये समूह अब खुद से पेटिंग करती है, उसके लिए संसाधन को जुटाती है और उनको बेचती है। इनकी आय को बढ़ाने के लिए उषा मार्टिन फाॅउंडेशन की ओर से महिला समूह को ठोंगा निर्माण एवं बिक्री से भी जोड़ा है। अब यह समूह प्रतिदिन कंज्यूमर स्टोर को एक हजार ठोंगा उपलब्ध करायेगी। उषा मार्टिन फाॅउंडेशन के हेड डाॅ मयंक मुरारी ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए कई आयामों पर कार्य चल रहा है। सुदूर गांव की 15 आदिवासी युवतियों को एकल विद्यालय का शिक्षक बनाया गया है। इन विद्यालयों के माध्यम से वह गांव में शिक्षा का अलख जगाने के साथ जागरण का काम कर रही है। फाॅउंडेशन के माध्यम 2024 में  तीन सौ से अधिक ग्रामीण महिलाओं को टेलरिंग, ब्यूटिशियन एवं फैशन डिजाइनिंग, फूड एंड विभरेज, कढ़ाई, कप-प्लेट निर्माण एवं अन्य स्वरोजगार के माध्यम से जोड़ा जा चुका है। इसके अलावा 200 से अधिक महिलाओं को नकदी फसल, मशरूम एवं ग्राफ्टेड सब्जी के व्यवसाय से आमदनी कर रही है। लाइवलीहुड कोर्डिनेटर संगीता कुमारी ने बताया कि ग्रामीण महिलाओें की मांग पर उनके स्वरोजगार के लिए उषा मार्टिन के माध्यम से स्वचालित ठेला उपलब्ध कराया गया है। ठेला आरा की गीता लिंडा और प्रेमिका कुजूर, हेसल की नीलम कुमारी, बरकुंबा की दमयंती गारी और हरातु की पूनम देवी है। गीता लिंडा कहती है कि ठेला से अब स्वरोजगार आसान हो जायेगा। इसके माध्यम से आमदनी भी बढ़ेगा। पहले कोई साधन नहीं होने से परेशानी होती थी।
<span;>उषा मार्टिन फाॅउंडेशन की ओर से सुदूर गांवों में चलनेवाले एकल विद्यालय में सोलर लाइट की व्यवस्था की गयी है। उक्त जानकारी एडुकेशन कॉर्डिनेटर वरूण कुमार ने दीं। उन्होंने बताया कि बैजनाथ टाटा, सिरका, असरी, शासनबेड़ा, जराटोली, बानपुर, जरगा, मेढ़ा, कामता और जिदू गांवों में सुचारू रूप से शिक्षा के लिए सोलर लाइट के अलावा, दरी, किताब, खेल सामग्री दी गयी है।

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