Advertisements
Spread the love

घाटशिला : झारखंड सरकार वन पट्टा देने में कंजूसी की है :: लखन मार्डी…

दीपक नाग… ✍️

Advertisements

आज भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जनजाति मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष, झारखंड हाई कोर्ट के अधिवक्ता लखन मार्डी ने हेंदलजुड़ी पंचायत के जुआलभांगा गांव का दौरा किया। ग्रामीणों ने समस्याएं सुनाएं। लखन मार्डी ने अपने आदिवासी समाज के देवतुल्य ग्रामीणों को सम्बोधित कर याद दिलाते हुए कहा कि 2019 के 13 फरवरी को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने वन भूमि पर खेती करने एवं जंगलों के अंदर निवास करने वाले आदिवासी एवं अन्य परंपरागत वन निवासियों को वन एवं वन भूमि से बेदखलीकरण का आदेश जारी किया था। वन अधिकार अधिनियम के तहत अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वनवासियों द्वारा भूमि स्वामित्व के दावों को विभिन्न आधारों पर खारिज कर दिया गया था। मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार की ओर से आदिवासियों को जंगलों से हटाने के आदेश पर रोक लगाने के लिए रिव्यू पिटीशन फाइल किया। तब जाकर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी 2019 के आदेश पर रोक लगा दिया और लाखों-लाख आदिवासियों को बेघर होने से बचाए गए। मोदी जी आदिवासियों का रक्षा कवच है।

13 फरवरी 2019 को जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस नवीन सिन्हा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की बेंच ने 16 राज्यों के करीब 20 लाख आदिवासियों के जमीन पर कब्जे के दावों को खारिज करते हुए राज्य सरकारों को आदेश दिया था कि वह अपने कानून के मुताबिक जमीनी खाली काराएं। सुप्रीम कोर्ट में राज्यों द्वारा दायर हलफनामे के अनुसार वन अधिकार अधिनियम के तहत अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वनवासियों द्वारा किए गए लगभग 20 लाख भूमि स्वामित्व के दावों को विभिन्न आधारों पर खारिज कर दिया गया है इनमें वह लोग शामिल हैं जो यह सबूत नहीं दे पाए कि कम से कम तीन पीढियां से भूमि उनके कब्जे में थी। मोदी सरकार ने आदिवासियों को बेदखल होने से बचाया दूसरी और झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार ने आदिवासियों को भूमि पट्टा देने में भी कंजूसी की है। वन पट्टा के लिए लोग दर दर भटक रहें है।

झारखंड छोड़कर ज्यादातर राज्यों में पेसा कानून लागू है। झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार ने 6 (छे) साल में पेसा कानून को लागू नहीं कर पाया। देश के पांचवी अनुसूची क्षेत्र में आदिवासी स्वशासन को सक्षम करने के लिए 24 दिसंबर 1996 को पेसा अधिनियम लागू किया गया था। ग्राम सभा के माध्यम से आदिवासियो को एक संवैधानिक अधिकार मिला हुआ है। झारखंड राज्य की साढे चार हजार पंचायत में से 2026 पंचायत पांचवी अनुसूची क्षेत्र में है जो पंचायत पेसा के अधीन आती है । झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार ने पांचवी अनुसूची क्षेत्र के नियमों का उल्लंघन करते हुए उनके माफियाओं के माध्यम से कोयला, बालू, पत्थर,लकड़ी आदि झारखंड लुटाने और लूटने काम जारी रखा है इसीलिए पेसा कानून और पांचवी अनुसूची के प्रावधानों को लागू नहीं किया है। पेसा कानून को लागू नहीं कर आदिवासियों को उनके अधिकारों से वंचित करने का काम जेएमएम सरकार ने किया है।

मौके पर फकीर सोरेन, गुरुचरण बास्के, सालखु मुर्मू, सुशील मुर्मू, किरण कुमार सिंह आदि एवं ग्रामीण उपस्थित थे।

You missed