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जेएलकेएम जिला अध्यक्ष दीपक महतो पर ₹1 लाख वसूली का आरोप, पीड़ित परिवार प्रकरण से संगठन में विवाद तेज

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रिपोर्टर – जगबंधु महतो

पीड़िता ने लगाया ₹1 लाख अवैध वसूली का आरोप, प्रखंड अध्यक्ष के निष्कासन के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलकर बोले

गम्हरिया : सरायकेला-खरसावां
जिले के गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत कांड्रा से एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसमें सर्पदंश से मृत बच्चे के परिजनों को मिली सरकारी सहायता राशि को लेकर विवाद गहरा गया है। इस पूरे प्रकरण ने न केवल सामाजिक स्तर पर चिंता बढ़ाई है, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज कर दी है। कांड्रा निवासी संगीता दास ने आरोप लगाया है कि उनके पुत्र अंश दास की सर्पदंश से हुई मृत्यु के बाद मिली ₹4 लाख की सरकारी सहायता राशि में से ₹1 लाख की कथित अवैध वसूली की गई। उन्होंने झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के जिला अध्यक्ष दीपक महतो पर यह गंभीर आरोप लगाया है।
पीड़िता के अनुसार, मुआवजा मिलने के बाद उनसे जबरन एसबीआई का एक चेक भी लिया गया और लगातार दबाव बनाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रात में घर पहुंचकर उन्हें धमकाया गया और पैसे नहीं देने पर मुआवजा वापस करवा देने की बात कही गई। संगीता दास का कहना है कि यह राशि उनके छोटे बेटे के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जिसे वह सुरक्षित निवेश (फिक्स डिपॉजिट) के रूप में रखना चाहती हैं ताकि उसकी पढ़ाई सुनिश्चित हो सके। मामले को लेकर उन्होंने 21 अप्रैल 2026 को सरायकेला विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी प्रेम मार्डी को लिखित शिकायत सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। संगठन में कार्रवाई और विवाद तेज
इस घटनाक्रम के बीच पार्टी संगठन ने गम्हरिया प्रखंड अध्यक्ष को पद से निष्कासित कर दिया। जारी पत्र में अनुशासनहीनता, गुटबाजी और संगठन विरोधी गतिविधियों जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व प्रखंड अध्यक्ष का जवाब
निष्कासन के बाद प्रखंड अध्यक्ष रहे गोपाल चंद्र महतो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संगठन के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वह एक पीड़ित परिवार के साथ हो रही कथित अवैध वसूली का विरोध कर रहे थे, जिसके चलते उन्हें निशाना बनाया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सच्चाई उजागर होने से रोकने के लिए उन्हें बदनाम कर पद से हटाया गया। साथ ही यह भी कहा कि यदि गरीबों के हक के लिए आवाज उठाना अपराध है, तो वह आगे भी ऐसा करते रहेंगे। फिलहाल जांच और कार्रवाई की मांग
पूरा मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक जांच की मांग के बीच है। पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की अपील की है, जबकि संगठन के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।

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