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बिहार : “पहले चरण का प्रचार थमा, अब सीटों को बचाने की चुनौती “

संजय कुमार विनित… ✍️

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बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में कुल 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर आज शाम चुनाव का प्रचार थम गया। एनडीए और महागठबंधन ने अपनी शक्ति के अनुसार ताकत झोंक दी। आरोप -प्रत्यारोप शब्द वाण का घमासान मचा रहा। अब 3 करोड़ 75 लाख 13 हजार 302 मतदाताओं के द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के सियासी भविष्य का फैसला तय किया जाना है। पहले चरण में तेजस्वी के सामने अपनी सीटों को बचाए रखने की चुनौती होगी तो नीतीश कुमार को अपनी कुर्सी बचाए रखने के लिए जद्दोजहद करनी होगी। 

प्रथम चरण में 121 सीटों पर महागठबंधन की तरफ से सबसे ज्यादा आरजेडी के 72 उम्मीदवार मैदान में हैं तो एनडीए की ओर से जेडीयू 57 सीटों पर किस्मत आजमा रही है। इस तरह से पहले चरण का चुनाव तेजस्वी यादव के लिए अपने किले को बचाए रखने की चुनौती है तो नीतीश कुमार के लिए अपनी वापसी का चैलेंज है। पिछले चुनाव में इन 121 सीटों में महागठबंधन ने 61 सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि एनडीए को 59 सीटें मिली थीं। अगर गठबंधन से हटकर पार्टी की बात की जाये तो पहले चरण की जिन 121 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, उसमें सबसे ज्यादा सीटें आरजेडी ने 42 सीटों पर जीत का परचम फहराया था जबकि 32 सीटें बीजेपी ने जीती थीं। जेडीयू के 23 विधायक जीतकर आए थे और कांग्रेस के 8 विधायक थे। 

एनडीए की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, जे पी नड्डा ,यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता,असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्वशर्मा और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित कई नेताओं ने चुनाव प्रचार कर एनडीए के प्रत्याशियों के लिए वोट मांगे, तो महागठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी , सपा प्रमुख अखिलेश यादव चुनावी मैदान में उतरकर समर्थन मांगा। लालू यादव ने भी एक सभा-शो कर जेल में बंद रीतलाल यादव के लिए दानापुर में वोट मांगा। एनडीए के मुकाबले महागठबंधन के स्टार प्रचारकों की सभा, रोड शो कम हो पायी। पर शब्दों के बाण दोनों ही गठबंधनों से चला जो चुनाव प्रचार को और भी रोचक बना दिया। 

पप्पू, अप्पू, टप्पू, गप्पू , जंगलराज, गुंडाराज, नादान, बच्चा, बैंड, बाजा, बारात, झुनझुना जैसे शब्दों के साथ साथ चरमपंथी से लेकर घर से निकलने मत देना और हाथ, आंख तोड़ फोड़ देने तक की धमकी वाली प्रचार भी लोगों ने देखें और मजे लिये। राम मंदिर का भी मुद्दा गरमाया रहा। ये अलग बात है कि चुनाव आयोग इन धमकियों पर समुचित कारवाई की ओर अग्रसर है। पर नेताओं के इन बयानों से मतदाताओं ने अब अपने लिए पांच साल के लिए प्रतिनिधियों को चुनने के लिए विचाररत हैं। 

पहले चरण में कुल 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर 6 नवंबर को वोटिंग होगी। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, इस चरण में 3 करोड़ 75 लाख 13 हजार 302 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। जिनमें 1 करोड़ 98 लाख 35 हजार 325 पुरुष, 1 करोड़ 76 लाख 77 हजार 219 महिलाएं और 758 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। इन सीटों पर 1,314 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 1,192 पुरुष और 122 महिलाएं हैं। इनमें 102 सीटें सामान्य वर्ग और 19 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच कांटे का माना जा रहा है।जनसुराज,एआईएमआईएम भी कयी सीटों पर सिधी टक्कर दे रही है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम भी पहले चरण की 8 सीटों पर किस्मत आजमा रही है। साथ ही चंद्र शेखर और स्वामी प्रसाद मौर्य की पार्टी ने भी उम्मीदवार उतारे हैं। इसके अलावा जन सुराज पार्टी भी पहले चरण की 121 सीटों में से 119 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। 

पहले चरण में महागठबंधन की तरफ आरजेडी 72 सीट पर चुनाव लड़ रही है तो उसके सहयोगी कांग्रेस 24 और सीपीआई माले 14 सीट पर किस्मत आजमा रहे हैं। वीआईपी और सीपीआई छह-छह सीट पर चुनाव लड़ रही हैं, जबकि सीपीएम तीन और आईपी गुप्ता की इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (आईआईपी) ने दो सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं।इस तरह छह सीटों पर महागठबंधन की दोस्ताना लड़ाई है। 

एनडीए की तरफ से जेडीयू पहले फेज में 57 सीट पर किस्मत आजमा रही है तो बीजेपी ने 48 सीट पर उम्मीदवार उतारे हैं. चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) ने 13 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएम के दो प्रत्याशी मैदान में हैं और जीतनराम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) भी एक सीट पर चुनाव लड़ रही है। 

पहले चरण के चुनाव में असल लड़ाई जदयू की है, जिसमें महागठबंधन के आरजेडी से कांग्रेस और लेफ्ट तक से उसे दो-दो हाथ करना पड़ रहा है। 2020 में आरजेडी के साथ सीधी लड़ाई में जेडीयू फेल रही थी।इस बार के चुनाव में जदयू को महागठबंधन से ही नहीं बल्कि जन सुराज से भी मुकाबला करना पड़ रहा है, पर जदयू के लिए चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा का साथ होना सुखद है। जो पिछले चुनाव में साथ नहीं थे। बिहार की सियासत बीस बर्षो से नीतीश कुमार के इर्द गिर्द होने के कारण सत्ता विरोधी लहर की संभावना और भाजपा के मुखर होकर चुनाव लड़ने के कारण यह चुनाव जदयू के लिए बिल्कुल अलग और चुनौतियों से भरा है। 

महागठबंधन के सीएम पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव के लिए पहले चरण का चुनाव काफी अहम माना जा रहा है।पिछली बार तेजस्वी यादव ने सारण और भोजपुर क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन कर आरजेडी को मुख्य मुकाबले में ला दिया था। पहले चरण में महागठबंधन को एनडीए से ज्यादा सीटें मिली थीं, इस लिहाज से अगर तेजस्वी यादव को सत्ता के सिंहासन तक पहुंचना है तो उन्हें पहले चरण की ज्यादा से ज्यादा सीटों पर अपनी जीत दर्ज करानी होगी। तेजस्वी के सीट राधोपुर में भी 6 नवंबर को चुनाव होने हैं, अपने भाई तेजप्रताप यादव से निपट कर अपनी जीत सुनिश्चित करने के साथ सहयोगी दलों की जीत की व्यवस्था कर पाने की चुनौती सामने है। इसबार चिराग पासवान का एनडीए के साथ होना और उपेंद्र कुशवाहा का नीतीश कुमार के पाले में होने से तेजस्वी यादव की चुनौती काफी बढी हुई है। 

फिलहाल प्रथम चरण का प्रचार थम गया है।पहले चरण के चुनाव में 121 विधानसभा क्षेत्रों में 6 नवंबर को मतदान होंगे। इस चरण में 1314 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। सभी मतदान केंद्रों पर सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था के लिए चुनाव आयोग संकल्पित है। बिहार राजनीति की धुरी रहे दोनों गठबंधनों के लिए 6 नवंबर का प्रथम चरण का चुनाव दशा दिशा तय करेगी। महागठबंधन अपने सीटों को कितना बचा पाती है और एनडीए अपने सीटों पर कितनी बढत बना पाती है, अब ये मतदाताओं के हाथ में है।

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