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मुसाबनी : दादा की जमीन गई, अब पोते ने रोकी खदान गेट का नाकेबंदी किया

रिपोर्ट : संजय कुमार दास

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दादा की जमीन गई, अब पोते ने रोकी खदान की रफ्तार — 54 साल पुराने मुआवजे विवाद पर साउथ सुरदा फोर सॉफ्ट खदान गेट पर अनिश्चितकालीन नाकाबंदी शुरू 57 परिवारजनों के साथ गेट पर डटे दीपक पातर ।

दीपक पात्र का कहना है कि, अब केस नहीं, अधिकार चाहिए… मुआवजा लिए बिना नहीं हटेंगे”कंपनी प्रतिनिधियों के आने का दावा, ग्रामीण समर्थन का भरोसा — आंदोलन को जमीन विवाद से जन आंदोलन बनाने की तैयारी मुसाबनी कई दशक पुराने भूमि विवाद को लेकर शुरू हुई लड़ाई अब सीधे खदान के मुख्य गेट तक पहुंच गई है। साउथ सूरदा फोर सॉफ्ट खदान के गेट पर मंगलवार से दीपक पातर और उनके परिवार ने नाकाबंदी शुरू कर दी।

आंदोलनकारियों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं बल्कि उन सभी परिवारों की आवाज है जिनकी जमीन पर वर्षों से कब्जा होने और मुआवजा नहीं मिलने का आरोप लगाया जा रहा है। नाकाबंदी स्थल पर दीपक पातर अपने परिवार के साथ दिन-रात डटे रहने का दावा कर रहे हैं। उनके अनुसार, उनके परिवार के कुल 57 सदस्य इस आंदोलन में शामिल हैं और जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।दीपक पातर ने कहा कि उनके पूर्वजों की जमीन पर वर्षों पहले खनन गतिविधियां शुरू हुईं लेकिन परिवार को आज तक न्याय नहीं मिला। उनका कहना है कि अब यह संघर्ष केवल मुआवजे का नहीं बल्कि अधिकार और भविष्य का प्रश्न बन चुका है।

दीपक पातर का दावा है कि कंपनी की ओर से कुछ अधिकारी उनसे मिलने पहुंचे थे और उन्हें कानूनी रास्ता अपनाने की सलाह दी गई। इस पर उन्होंने कहा कि लंबे समय से प्रक्रिया और इंतजार के बाद अब वे प्रशासन के समक्ष सीधे अपनी मांग रखेंगे। उनका कहना है कि वे उपायुक्त से न्याय और अपने अधिकार की मांग करेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि आसपास के कई ऐसे परिवार जिनकी जमीन को लेकर समान शिकायतें हैं, वे इस आंदोलन से जुड़ने की तैयारी में हैं। दीपक पातर ने कहा कि गांव के लोगों का समर्थन उन्हें मिल रहा है और हर परिस्थिति में नाकाबंदी जारी रहेगी।हालांकि, इस मामले में कंपनी प्रबंधन और प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया समाचार लिखे जाने तक सामने नहीं आई थी। यदि कंपनी या प्रशासन की ओर से कोई पक्ष आता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

बहरहाल, कंपनी प्रबंधन को पुराने दस्तावेजों को टटोलना होगा कि, आंदोलनरत लोगों के मांगों के अनुसार कोई अनुबंध या अन्य कोई दस्तावेज मामले से संबंधित है कि नहीं।

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