
ओलचिकि के 100 साल पर ज्ञान की नई रोशनी: 340 अभ्यर्थियों की भागीदारी, संताली भाषा के प्रति बढ़ता समर्पण

चाण्ड़िल:-सरायकेला-घाटशिला, पंजीकृत संस्था सत्य नारायण सोशियो इकोनॉमिक एंड रिसर्च सेंटर की ओर से घाटशिला कॉलेज में एसएनएम ट्रॉफी संताली टैलेंट सर्च क्वेस्ट परीक्षा का सफल एवं प्रेरणादायक आयोजन किया गया। इस परीक्षा केंद्र पर कुल 189 अभ्यर्थियों ने भाग लिया, जबकि चांडिल और घाटशिला के दोनों केंद्रों को मिलाकर कुल 340 अभ्यर्थी शामिल हुए।
इस प्रतियोगिता में झारखंड के साथ-साथ उड़ीसा और पश्चिम बंगाल से भी अभ्यर्थियों की भागीदारी रही, जो संताली भाषा और ओलचिकि लिपि के प्रति बढ़ती जागरूकता और समर्पण को दर्शाता है। खास बात यह रही कि छोटे-छोटे बच्चों से लेकर युवा और उम्रदराज लोग तक इस परीक्षा में शामिल हुए-जो यह साबित करता है कि अपनी मातृभाषा के प्रति लगाव हर पीढ़ी में जीवित है।
घाटशिला परीक्षा केंद्र में पंडित रघुनाथ मुर्मु मॉडल स्कूल पुनासीबाद के छोटे-छोटे बालक एवं बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर सभी का ध्यान आकर्षित किया। इन बच्चों की सहभागिता ने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाली पीढ़ी अपनी भाषा और लिपि को लेकर पूरी तरह जागरूक और प्रतिबद्ध है।संस्था प्रमुख सत्यनारायण मुर्मू ने बताया कि यह संताली टैलेंट सर्च परीक्षा रघुनाथ मुर्मू द्वारा आविष्कृत ओलचिकि लिपि के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में प्रारंभ की गई है। उन्होंने बताया कि तीन वर्ष पूर्व इस पहल की शुरुआत महज 10 अभ्यर्थियों से हुई थी, जो बढ़कर आज 340 तक पहुंच गई है-यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि और समाज की जागरूकता का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि इस परीक्षा का मुख्य उद्देश्य संताली भाषा-साहित्य के विकास के साथ-साथ ओलचिकि लिपि को जन-जन तक पहुंचाना और समाज को अपनी भाषा, संस्कृति, रीति-रिवाज एवं पारंपरिक व्यवस्था के प्रति जागरूक करना है।
इस परीक्षा के माध्यम से चयनित 50 अभ्यर्थियों को रघुनाथ मुर्मू जयंती के अवसर पर चांडिल में आयोजित समारोह में सम्मानित किया जाएगा। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले को लैपटॉप, द्वितीय को टैबलेट तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले को स्मार्टफोन देकर पुरस्कृत किया जाएगा।
घाटशिला कॉलेज के केंद्राधीक्षक डॉ. रजनी कांत मांडी ने बताया कि अभ्यर्थियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। पुरुष और महिलाएं दोनों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और परीक्षा शांतिपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।इस अवसर पर झारखंड सरकार से यह मांग भी उठाई गई कि पूर्व शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन द्वारा सदन में उठाए गए 30,000 शिक्षक बहाली के प्रस्ताव को शीघ्र लागू किया जाए तथा “बंगाल मॉडल को भी धरातल पर उतारा जाए, ताकि संताली सहित आदिवासी भाषाओं को शिक्षा व्यवस्था में उचित स्थान मिल सके।साथ ही झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में प्रश्न पत्र केवल देवनागरी में ही नहीं, बल्कि संताली भाषा और ओलचिकि लिपि में भी उपलब्ध कराने की मांग की गई। यह मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संताली भाषा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल है, फिर भी व्यवहारिक स्तर पर इसकी अनदेखी चिंता का विषय बनी हुई है।परीक्षा संचालन में भुजंग टुडू, पितांबर हांसदा, सुधीर चंद्र मुर्मु, हाराधन हांसदा, सत्य रंजन सोरेन, शंकर मुर्मू, डॉ० चरण हासदा, मनोहर हसदा, अनिमा टुडू, दिनेश सोरेन, नरेन हसदा, विभूति मार्डी, सुंदर हसदा, हरेंद्र टुडू, लखन मांझी, सीताराम मांझी,सोनाराम मांझी,सहित अन्य सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

