
कठिन परिस्थिति में भी सत्य की खोज करनी चाहिए : आदित्य पंडित महाराज

रिपोर्टर – अभिजीत सेन
जमशेदपुर/पोटका । पोटका प्रखंड के हरिना पंचायत अंतर्गत नारायणपुर गांव में चल रहे सात दिवसीय भागवत कथा यज्ञ के दूसरे दिन कथा स्थल पर भारी संख्या में भक्तों की उपस्थिति देखी गई। सभी भक्तगण कथावाचक की मधुर और प्रेरणादायक वाणी को सुनने में एकाग्र रहे।
द्वितीय दिवस की कथा में वृंदावन से पधारे कथावाचक आदित्य पंडित महाराज ने महाराज परीक्षित की रक्षा, भागवत प्रकट, परीक्षित के अभिशाप, गंगा और शुकदेव जी का आगमन, परीक्षित के प्रश्न तथा शुकदेव महाराज की कथा जैसे कई महत्वपूर्ण और गंभीर आध्यात्मिक विषयों पर विस्तृत प्रवचन दिया।
कथावाचक ने बताया कि परीक्षित, जो महाभारत के युधिष्ठिर के पोते थे, एक बार शिकार के दौरान भूलवश एक मृत सर्प को सन्यासी शमिक के कंधे पर रख देते हैं। इसे अपमान समझकर उनके पुत्र श्रृंगी ने परीक्षित को सात दिन बाद सांप के दंश से मृत्यु का अभिशाप दे दिया। ठीक सातवें दिन तक्षक नाग ने उन्हें डंस लिया और उनका देहांत हो गया।
महाराज ने कहा कि यह प्रसंग हमें संतों और ब्राह्मणों के सम्मान, कर्म सिद्धांत, धैर्य, समर्पण, भविष्य की अनिश्चितता, ज्ञान की खोज, भक्ति की शक्ति और समय के महत्व की सीख देता है।
उन्होंने शुकदेव महाराज की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कथा मनुष्य को अहंकार त्याग, सेवा, समानता, नैतिकता और शुद्ध आचरण का मार्ग दिखाती है।
महाराज ने कहा— “सांसारिक जीवन में अक्सर कठिन परिस्थितियों में लोग सत्य को छोड़कर असत्य का सहारा ले लेते हैं, जो सर्वथा अनुचित है। जीवन की सबसे कठिन परिस्थितियों में भी सत्य की खोज जारी रखना ही मानव का सर्वोच्च धर्म है।”
आज की कथा का संचालन रविंद्र नाथ मंडल (निवासी – चाईलामा, राजनगर) उनकी धर्मपत्नी रीता मंडल एवं पूरे परिवार द्वारा किया गया। वहीं कथा समाप्ति के बाद प्रसाद वितरण का आयोजन नारायणपुर निवासी लतिका मंडल एवं उनके परिवार द्वारा संपन्न कराया गया।

