
आईसीएआर–आईआईएबी, रांची में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन, 1000 से अधिक आदिवासी महिलाओं की भागीदारी

Arjun Kumar Pramanik…….✍️
रांची । आईसीएआर–भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (ICAR–IIAB), रांची ने आशा फाउंडेशन, नामकुम के सहयोग से नामकुम स्थित सभय बागान स्कूल मैदान में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन किया। कार्यक्रम में आसपास के गांवों से आई 1000 से अधिक आदिवासी महिलाओं, बच्चों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर महिलाओं के योगदान, उपलब्धियों और सशक्तिकरण को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध लोकगायक मधु मंसूरी हसमुख रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि महिलाएं परिवार की रीढ़ होती हैं और समाज में सामंजस्य, स्थिरता तथा सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं समाजसेवी डॉ. गीता गुप्ता ने स्वास्थ्य और स्वच्छता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाएं परिवार की प्रमुख देखभालकर्ता होती हैं और स्वच्छता, पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता के माध्यम से पूरे परिवार के स्वास्थ्य को बेहतर बना सकती हैं। आईसीएआर–आईआईएबी के संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक) डॉ. के. के. कृष्णानी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है और खेतों में होने वाले लगभग 60–70 प्रतिशत कार्य महिलाओं द्वारा किए जाते हैं। उन्होंने महिला किसानों को ज्ञान, प्रशिक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों से सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. अरुणिता रक्षित ने प्रेरणादायक महिलाओं की कहानियां साझा करते हुए पद्मश्री से सम्मानित पर्यावरण कार्यकर्ता चामी मुर्मू, जिन्होंने देशभर में 25 लाख से अधिक पेड़ लगाए, तथा झारखंड की पद्मश्री सम्मानित चुटनी देवी (चुटनी महतो) का उल्लेख किया, जो डायन प्रथा के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रही हैं। नोडल अधिकारी (TSP) डॉ. खेलाराम सोरेन ने बताया कि आईसीएआर–आईआईएबी किसानों, विशेषकर आदिवासी महिलाओं की आय और जीवन स्तर में सुधार के लिए विविधीकृत कृषि गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। आशा फाउंडेशन के संस्थापक अजय जायसवाल ने आदिवासी ग्रामीण परिवारों में महिलाओं के सशक्तिकरण पर अपने विचार साझा किए और आईसीएआर–आईआईएबी के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। वहीं पूनम टोप्पो ने महिलाओं के अधिकारों और आदिवासी महिलाओं को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में डॉ. जयंता लायक ने समेकित कृषि प्रणाली (Integrated Farming System – IFS) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि फसल, पशुपालन, मत्स्य और कुक्कुट पालन को एकीकृत कर किसानों की आय के विविध स्रोत विकसित किए जा सकते हैं। डॉ. मदन कुमार ने प्रधानमंत्री कुसुम योजना और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। डॉ. सौमजीत सरकार ने खाकी कैम्पबेल नस्ल की बत्तख पालन के लाभों और छोटे पशु-पक्षी पालन में महिलाओं की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में पुष्पा तिर्की (मुखिया, गढ़खटांगा पंचायत), बलदेव चंद्र महतो (प्रधानाध्यापक, राजकीय मध्य विद्यालय सभयबागान), डॉ. सुजय बी. कदेमानी (वैज्ञानिक, ICAR-IIAB), डॉ. अवनी कुमार सिंह (प्रमुख, ICAR–RCER, प्लांडू) तथा डॉ. वी. के. यादव सहित कई गणमान्य अतिथि एवं ग्रामीण प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस अवसर पर स्थानीय महिला समूहों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। साथ ही पारंपरिक आदिवासी व्यंजनों के कई स्टॉल भी लगाए गए, जिन्होंने आगंतुकों का विशेष आकर्षण प्राप्त किया। कार्यक्रम के दौरान आईसीएआर–आईआईएबी द्वारा महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों को भी प्रदर्शित किया गया। इनमें सहभागी धान, सब्जी बीज, दलहन एवं तिलहन जैसी पोषक फसलों का प्रोत्साहन, क्षमता निर्माण प्रशिक्षण, 10,000 पौधों का सामूहिक रोपण, महिला किसानों के बीच बतख एवं सूकर पालन को बढ़ावा देना तथा बालिकाओं को फुटबॉल के माध्यम से सशक्त बनाने जैसी पहलें शामिल हैं। इन पहलों की उपस्थित अतिथियों द्वारा सराहना की गई।

