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पेड़ों के सहारे दौड़ाई गई बिजली लाइन! कुकड़ू के निर्माणाधीन अल्पसंख्यक विद्यालय में सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल

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रिर्पोटर : जगबंधु महतो

पोल की जगह पेड़ों पर तार, मीटर से पहले कनेक्शन का भी आरोप; ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

कुकड़ू: सरायकेला-खरसावां जिले के कुकड़ू प्रखंड के शीशी गांव स्थित निर्माणाधीन अल्पसंख्यक विद्यालय तक बिछाई गई विद्युत लाइन को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी बिजली लाइन निर्धारित विद्युत पोल लगाने के बजाय सड़क किनारे खड़े पेड़ों के सहारे टांग दी गई है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

ग्रामीणों के अनुसार कई स्थानों पर बिजली के तार क्षतिग्रस्त हैं और उनमें करंट लीकेज जैसी स्थिति दिखाई दे रही है। कुछ जगहों पर तार जमीन से काफी कम ऊंचाई पर लटक रहे हैं, जिससे बच्चों और राहगीरों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। इसके अलावा कई स्थानों पर विद्युत तार निजी खेतों के ऊपर से भी गुजारे गए हैं, जिससे किसानों में भी नाराजगी है।

ग्रामीणों का आरोप है कि विद्युत अधिनियम, 2003 तथा केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के सुरक्षा मानकों के अनुरूप लाइन निर्माण नहीं किया गया। उनका कहना है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी करते हुए कार्य कराया गया है। साथ ही विद्यालय निर्माण में लगे भारी वाहनों के कारण गांव की कच्ची सड़क भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।

मामले को लेकर एक और गंभीर आरोप सामने आया है। ग्रामीणों का दावा है कि मीटर तक बिजली पहुंचने से पहले ही दूसरी लाइन से कनेक्शन जोड़कर बिजली का उपयोग किया जा रहा है। यदि जांच में यह आरोप सही साबित होता है तो मामला बिजली चोरी की श्रेणी में आ सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद न तो संवेदक और न ही बिजली विभाग ने कोई कार्रवाई की। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और सुरक्षा मानकों के अनुरूप विद्युत लाइन को तत्काल दुरुस्त कराने की मांग की है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक संबंधित विभाग की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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