















सरला बिरला विश्वविद्यालय में देशभक्ति और सांस्कृतिक विविधता के साथ मनाया गया स्वतंत्रता दिवस











Arjun Kumar…✍️
नामकुम(राँची) । सरला बिरला विश्वविद्यालय, रांची में स्वतंत्रता दिवस समारोह देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाया गया। विश्वविद्यालय के खेल प्रांगण में आयोजित समारोह का शुभारंभ राष्ट्रीय ध्वज फहराने एवं सलामी के साथ हुआ। इसके पश्चात राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत, शहीदों एवं राष्ट्रवीरों के सम्मान में जयघोष तथा परेड का आयोजन किया गया, जिससे पूरा परिसर देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हो उठा।समारोह में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। विद्यार्थियों ने भारत के विभिन्न राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पारंपरिक वेशभूषा, नृत्य, योग एवं अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया। इन प्रस्तुतियों ने भारत की विविध भाषाओं, परंपराओं, रीति-रिवाजों और लोक-संस्कृतियों को दर्शाते हुए “अनेकता में एकता” का सुंदर संदेश दिया। देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति ने समारोह के उत्साह को और बढ़ाया। गायकों ने “अपनी धरती, अपना अंबर, अपना हिंदुस्तान” गीत प्रस्तुत कर मातृभूमि के प्रति प्रेम और गौरव की भावना व्यक्त की। प्रस्तुति ने उपस्थित विद्यार्थियों एवं अतिथियों में देशभक्ति का उत्साह भर दिया और पूरा परिसर देशभक्ति के सुरों से गूंज उठा । कार्यक्रम को विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. श्रीधर डांडिन, कुलपति प्रो. सी. जगनाथन, महानिदेशक प्रो. गोपाल पाठक एवं राज्यसभा सांसद सह निदेशक, प्लानिंग एंड डेवलपमेंट, एसबीयू डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने संबोधित किया। अपने प्रेरणादायक संबोधनों के माध्यम से उन्होंने विद्यार्थियों को देशभक्ति, जिम्मेदारी, युवा नेतृत्व एवं राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूक किया । समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने विशेष रूप से वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर का उल्लेख करते हुए इसके राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय चेतना और एकता के संदेश को रेखांकित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से वंदे मातरम् की भावना को समझते हुए उसे अपने कार्यों, जिम्मेदारियों और राष्ट्र के प्रति समर्पण के माध्यम से आगे बढ़ाने का आह्वान किया। डॉ. वर्मा ने युवाओं से अपनी आकांक्षाओं और सपनों को राष्ट्र की प्रगति से जोड़ने तथा शिक्षा, नवाचार, प्रतिभा और जिम्मेदार नागरिकता के माध्यम से एक सशक्त एवं विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल भावना तक सीमित न रहकर सार्थक कार्यों और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता में दिखाई देनी चाहिए । प्रो. श्रीधर डांडिन ने विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि भारत का भविष्य युवाओं के विचारों, चरित्र और कर्मों से निर्मित होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी प्रतिभा और क्षमताओं का उपयोग देश की प्रगति के लिए करने का आह्वान किया । प्रो. सी. जगनाथन ने एकता, अनुशासन और जिम्मेदारी के महत्व पर जोर देते हुए विद्यार्थियों से अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को भी समझने और ईमानदारी से उनका निर्वहन करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार और अनुशासित युवा ही सशक्त राष्ट्र की नींव रख सकते हैं । प्रो. गोपाल पाठक ने युवा शक्ति को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि युवाओं की प्रतिभा, ऊर्जा और नवाचार की क्षमता को सकारात्मक दिशा देकर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने सपनों को राष्ट्र की प्रगति से जोड़ने का आह्वान किया । विद्यार्थियों की जीवंत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और प्रेरणादायक संबोधनों ने “अनेकता में एकता” की भावना को सशक्त किया तथा प्रत्येक नागरिक के राष्ट्र निर्माण में योगदान की सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया। विवि के माननीय प्रतिकुलाधिपति बिजय कुमार दलान ने स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर विवि परिवार को शुभकामना संदेश प्रेषित किया है।






