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हूल दिवस पर गूंजा सिद्धू-कान्हू का गौरवगान, मुरूमडीह में शहीदों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

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रिर्पोटर – जगबंधु महतो

मुरूमडीह में जल्द स्थापित होगी सिद्धू-कान्हू की भव्य प्रतिमा, संघर्ष और स्वाभिमान की विरासत होगी सशक्त

गम्हरिया: सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत दुग्धा पंचायत के मुरूमडीह गांव में मंगलवार को हूल दिवस पूरे श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। सीताराम टुडू की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में हूल क्रांति के अमर सेनानी सिद्धू-कान्हू सहित सभी शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भागीदारी ने हूल आंदोलन के प्रति लोगों की आस्था और सम्मान को दर्शाया।

कार्यक्रम की शुरुआत बोड़ पीड़ पारगाना राजेश टुडू द्वारा सिद्धू-कान्हू की बेदी पर विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। उन्होंने क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए हूल आंदोलन के शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर महान क्रांतिकारियों के बलिदान को याद किया और उनके संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

समारोह के मुख्य अतिथि झामुमो के केंद्रीय सदस्य गणेश माहली ने कहा कि मुरूमडीह गांव में शीघ्र ही सिद्धू-कान्हू की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा हूल क्रांति के महानायकों के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान की जीवंत पहचान बनेगी तथा आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास और विरासत से जोड़ने का कार्य करेगी।

उन्होंने कहा कि सिद्धू-कान्हू का आंदोलन केवल अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह नहीं था, बल्कि यह जल, जंगल और जमीन, स्वाभिमान तथा सामाजिक न्याय की रक्षा का ऐतिहासिक अभियान था। आज भी उनके विचार समाज को अपने अधिकारों की रक्षा, सामाजिक एकता और विकास के लिए प्रेरित करते हैं।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने हूल आंदोलन के शहीदों के बताए मार्ग पर चलने, समाज में एकता बनाए रखने तथा अपनी संस्कृति और विरासत की रक्षा का संकल्प लिया। इस अवसर पर कारजी बाबा लश्कर टुडू, अमृत महतो, भोमरा माझी, उदय मार्डी, जगदीश महतो, मंगल माझी, राजेश गोप, बुद्धेश्वर मार्डी, हेमंत मार्डी, बबलू प्रधान, सरोज मुखर्जी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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