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जनजातीय गौरव दिवस पर कार्यक्रम आयोजित देश की मुख्याधारा है आदिवासी समाज : आशा लकड़ा

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Arjun Kumar Pramanik…….✍️

राँची । आदिवासी समाज को मुख्यधारा में लाने की आवश्यकता नहीं है। आदिवासी समाज देश की मुख्यधारा है। देश की आजादी की बात हो, समाज निर्माण या जागरण का विषय हो। हर समय आदिवासी समाज ने देश को दिशा दिया है। उक्त बातें जनजातीय आयोग की सदस्य  आशा लकड़ा ने कही । वह गुरुवार को विश्व संवाद केंद्र और प्रभात प्रकाशन के सौजन्य से आयोजित परिचर्चा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि  के तौर पर बोल रही थी। कार्यक्रम का विषय था- जनजातीय गौरव दिवस  जो भगवान बिरसा के 150 वीं जयंती पर आयोजित किया गया था। आशा लकड़ा ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने जनजातीय समाज और देश के जागरण के लिए अविस्मरणीय कार्य किया। यही कारण है कि आज भारत के साथ विदेश में भी भगवान बिरसा मुंडा के योगदान को स्मरण किया जा रहा है। आज जो आदिवासी समाज पर संकट आया है। उनकी पहचान और संस्कृति पर जो आक्रमण हो रहा है। इससे निपटने के लिए हमें सदैव उलगुलान के लिए तैयार होना होगा। इस अवसर पर विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष रामावतार नारसरिया ने कहा कि इतिहास में जनजातीय आंदोलन को बहुत कमतर आका गया है। जनजातीय आंदोलन ने अंग्रेजों के खिलाफ जो आंदोलन चलाया, वह भुलाया नहीं जा सकता। अंग्रेजों ने नीहित स्वार्थ के कारण ही जनजातीय आंदोलन को बांटने का कार्य किया।
इस अवसर पर चिंतक और लेखक डाॅ मयंक मुरारी ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने 24 साल के उम्र में ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ सफल आंदोलन किया। इसके साथ ही उन्होंने धार्मिक एवं सामाजिक आदोलन के माध्यम से भारत को जगाने का कार्य किया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण प्रभात प्रकाशन के झारखंड हेड राजेश कुमार, धन्यवाद ज्ञापन स्निग्ध रंजन ने किया। इस अवसर पर पूर्व वीसी डाॅ अंजनी कुमार श्रीवास्तव, सरला बिरला के रजिस्टार विजय कुमार सिंह, राजेंद्र मिश्र, संजय जैन, सुषमा कुमारी, पिंकी खोया, देवेश अजमानी, अवनिंद्र कुमार, असीत कुमार आदि समाज के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।