
आईसीएआर-आईआईएबी ने खेत बचाओ अभियान के तहत हितधारक बैठक एवं कृषि आदान वितरण कार्यक्रम आयोजित किया


Arjun Kumar….✍️
नामकुम(रांची)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (आईसीएआर-आईआईएबी), रांची द्वारा खेत बचाओ अभियान (केबीए) के अंतर्गत हितधारक बैठक तथा जनजातीय उपयोजना (टीएसपी) के तहत जागरूकता एवं कृषि आदान वितरण कार्यक्रम का आयोजन गढ़खटंगा में किया गया। कार्यक्रम में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर इटकी एवं नामकुम प्रखंड की 15 पंचायतों के मुखिया, वार्ड सदस्य, महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्याएं, आसपास के गांवों के किसान तथा संस्थान के वैज्ञानिक एवं कर्मचारी सहित करीब 500 लोग उपस्थित रहे।
आईसीएआर-आईआईएबी के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि संस्थान अनुसंधान, आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार तथा जनजातीय क्षेत्रों के किसानों के साथ निरंतर संवाद के माध्यम से कृषि को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. विजई पाल भदाना ने बताया कि खेत बचाओ अभियान, मेरा गांव मेरा गौरव (एमजीएमजी) एवं जनजातीय उपयोजना के तहत पिछले एक माह में झारखंड के चार जिलों के पांच प्रखंडों के 50 से अधिक गांवों में जागरूकता एवं कृषि प्रसार कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिससे 2,500 से अधिक किसान लाभान्वित हुए। इस दौरान किसान गोष्ठी, खेत प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, जलवायु अनुकूल कृषि तथा सतत खेती की जानकारी दी गई।
उन्होंने बताया कि किसानों के बीच लगभग 500 सब्जी बीज किट, 2,000 किलोग्राम सूखा-सहनशील धान बीज, 1,500 किलोग्राम गुणवत्तायुक्त मक्का बीज तथा 4,000 किलोग्राम ढैंचा बीज का वितरण किया गया। इसके अलावा संस्थान की ओर से खेत प्रदर्शन के लिए ट्रैक्टर सहित अन्य संसाधन भी उपलब्ध कराए गए।
कार्यक्रम में इटकी, नामकुम एवं लालखटंगा पंचायतों के जनप्रतिनिधियों रितेश उरांव, फ्रांसिस्का केरकेट्टा, जिरेन टोप्पो एवं पुष्पा तिर्की ने वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने में संस्थान की भूमिका की सराहना करते हुए भविष्य में भी सहयोग का भरोसा दिलाया।
इस दौरान जनजातीय किसानों के बीच धान की उन्नत किस्म सीआर धान-320, सहभागी धान तथा रागी की उन्नत किस्म बिरसा मडुआ-3 सहित अन्य कृषि आदानों का वितरण किया गया। जागरूकता सत्र में डॉ. जयंत लायक एवं डॉ. कार्तिक शर्मा ने मृदा उर्वरता, समेकित कृषि प्रणाली, जैव उर्वरकों के उपयोग, फसल चक्र तथा दलहनी फसलों को अपनाने के महत्व पर किसानों को जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने एल-नीनो एवं जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभावों से अवगत कराते हुए वर्मी कम्पोस्ट, गोबर खाद एवं हरित खाद के उपयोग पर बल दिया।
अपने संबोधन में अर्जुन मुंडा ने कहा कि कृषि विकास कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन वैज्ञानिक भूमि उपयोग योजना, प्रभावी निगरानी तथा पंचायती राज संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है। उन्होंने किसानों से मृदा परीक्षण, फसल विविधीकरण, समेकित कृषि प्रणाली तथा आईसीएआर संस्थानों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों की तकनीकी सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग, भूमि की उर्वरता संरक्षण, बीज ग्रामों के विकास, मधुमक्खी पालन, लाख उत्पादन, महिला किसानों के सशक्तीकरण तथा ग्रामीण युवाओं को कृषि से जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
कार्यक्रम के अंत में संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक) डॉ. किशोर कृष्णानी ने धन्यवाद ज्ञापन किया
Related posts:

