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महान प्रकृति पर्व बांदना पर दिखा सूर्य ग्रहण का असर; कहीं हुई गठ पूजा; तो कई क्षेत्रों में

नहीं…

सरायकेला। पशुधन के सत्कार के रूप में मनाए जाने वाले क्षेत्र के महान प्रकृति पर्व बांदना पर सूर्य ग्रहण का असर देखा गया। जिसे देखते हुए कई ग्रामीण क्षेत्रों में बांदना पर्व के तहत गठ पूजा का आयोजन किया गया। तो कई एक गांव में सूर्य ग्रहण के प्रभाव को देखते हुए इसे स्थगित रखा गया। सरायकेला प्रखंड के दूधी गांव में परंपरागत तरीके से बांदना पर्व के अवसर पर गठ पूजा का आयोजन करते हुए गोटमाड़ा परंपरा का निर्वहन किया गया। इसके तहत चारागाह में पशुधन के सुरक्षित रहने के लिए गठ देवता, ग्राम देवता एवं जाहेर देवता की पूजा नाया माझी पुजारी द्वारा की गई। जिसमें गांव के सभी पशुपालक अपने अपने गाय बैलों को लेकर ग्राम स्थल पर पहुंचे। यहां परंपरा अनुसार गाय बैलों के सिंघों में तेल लगाया गया। और पूजा आराधना करने के पश्चात पूजा कर एक अंडा को घठ में रख दिया गया। उसके बाद उसी रास्ते से गाय बैलों को पार कराया गया। जिसमें जिस गाय बैल के पैरों द्वारा अंडा टूटा, उसे फूल माला पहनाकर और सिंदूर लगाकर छोड़ दिया गया। बताया गया कि उस गाय या बैल का मालिक अगले वर्ष खुशी से चावल दान करेगा। गठ पूजा और गोटमाड़ा संपन्न होने के बाद रात के समय ग्रामीण दल बल के साथ ढोल मादल बजाते हुए बांदना गीत गाकर घर घर जाकर गाय बैलों को जगाते रहे।

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