
देश सहित विदेशों में भी छऊ नृत्य कला के परचम लहरा चुके 54
वर्षीय सीनियर फैलोशिप विजेता गुरु ब्रजेंद्र कुमार पटनायक…
(अब नौनिहालों को गढ़ रहे हैं छऊ कला के भावी भविष्य के रूप में….)
सरायकेला। छऊ नृत्य कला की धरती माने जाने वाली सोलह कलाओं की नगरी सरायकेला की खासियत रही है कि यहां के परंपरागत हर घर में एक छऊ कलाकार है या फिर छऊ का ज्ञाता या छऊ कलाप्रेमी। इसी धरती से छऊ कला के दिग्गज कलाकारों ने छऊ नृत्य कला को विश्व पटल पर पहचान दिलाई है। जिसे भारत सरकार ने भी सर्वोच्च कला सम्मान पद्मश्री देकर छऊ नृत्य कला के आठ पुरुधाओं को सम्मानित किया है।


सरायकेला में ऐसे कई छऊ कलाकार आज भी है जिन्होंने छऊ कला के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया है। उन्हीं में से एक वरिष्ठ कलाकार हैं गुरु ब्रजेंद्र कुमार पटनायक। भारत सरकार के मिनिस्ट्री आफ कल्चर से सीनियर फैलोशिप अवॉर्डी 54 वर्षीय गुरु ब्रजेंद्र कुमार पटनायक उम्र के इस पड़ाव में भी छऊ कला के उत्थान के प्रति जज्बा रखते हैं। और सरायकेला छऊ ट्रेनिंग सेंटर का संचालन करते हुए नौनिहालों में सरायकेला छऊ के परंपरागत गुणों का समावेश कर रहे हैं। जिसमें अभी वे 20 बच्चों को पूरी तरह से नि:शुल्क छऊ नृत्य कला के साथ-साथ इसके सफरनामा और गौरवपूर्ण इतिहास की भी जानकारी दे रहे हैं। गुरु पटनायक बताते हैं कि ट्रेनिंग सेंटर के संचालन का उद्देश्य नई पीढ़ी को छऊ नृत्य कला के मूल को लेकर तैयार करना है।
ताकि भविष्य में इसकी पहचान बनी रहे। इनके साथ छऊ नृत्य कला के प्रसिद्ध वरिष्ठ वाद्य कलाकार सुनील कुमार दुबे इस नेक कार्य में सहयोग कर रहे हैं।
जाने गुरु ब्रजेंद्र कुमार पटनायक को :-
22 सितंबर 1998 को सरायकेला के एक साधारण परिवार में जन्मे गुरु ब्रजेंद्र कुमार पटनायक ने रांची यूनिवर्सिटी से बीकॉम पास की। सरायकेला छऊ डांस कल्चर के एमिनेंट एक्स्पोनेंट रहते हुए उन्होंने वर्ष 1984 में भारत सरकार के मिनिस्ट्री आफ कल्चर से सीनियर स्कॉलर और वर्ष 2000 में भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर से सीनियर फैलोशिप अवार्ड प्राप्त की। 4 वर्ष की उम्र से छऊ नृत्य कला की शिक्षा हासिल करते हुए इन्होंने पद्मश्री स्वर्गीय गुरु केदारनाथ साहू से विधिवत शिक्षा ग्रहण की। कोलकाता, ओडिशा सहित भारत के अन्य भागों में और विदेश के पेरिस एवं जर्मनी में लेक्चर तथा डेमोंसट्रेशन और वर्कशॉप भी किए। देश के झारखंड, उड़ीसा, वेस्ट बंगाल, बिहार, पंजाब, हरियाणा, असम, और मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में प्रसन्न करने के साथ-साथ विदेशी धरती पर डेनमार्क, पेरिस, साउथ कोरिया, इंडोनेशिया, रूस, जर्मनी, ऑस्ट्रिया के वियना एवं जापान में भी इन्होंने छऊ नृत्य कला का प्रदर्शन का परचम लहराया है।


