सरायकेला छऊ नृत्य झारखंड प्रदेश का एक सेमीक्लासिकल
डांस है : गुरु मलय कुमार साहू……
सरायकेला। सरायकेला छऊ नृत्य कला अपने आप में कला की एक संपूर्ण दुनिया है। सरायकेला छऊ नृत्य की विशिष्ट शास्त्रीय रूपों का निरूपण करते हुए श्री केदार आर्ट सेंटर के डायरेक्टर गुरु मलय कुमार साहू ने उक्त बातें कहीं।
झारखंड प्रदेश का एक सेमीक्लासिकल डांस :-
उन्होंने कहा कि सरायकेला छऊ नृत्य झारखंड प्रदेश का एक सेमीक्लासिकल डांस है। जिसमें छऊ डांस टेकनीक 108 उफली और मूवमेंट पर आधारित है। जिसमें चाली, और जम्प्स स्पाइरल मूवमेंट्स घुमा पद चक्र सभी एक डिस्टिंक्ट क्लासिकल ट्रेडीशन के साथ जुड़े हैं। वे बताते हैं कि श्री केदार आर्ट सेंटर एकमात्र छाऊ डांस सेंटर है, जहां परंपरागत छऊ को मूल रूप में और प्रदर्शन एवं प्रस्तुति में एक्सीलेंट टेस्ट बनाए रखा गया है। वे बताते हैं कि सरायकेला छऊ नृत्य कि शास्त्रीय ता प्रमाणित करने के लिए इस नृत्य में सम्मोहनकरण उत्पन्न करने की शक्ति भी मौजूद है।
गुरु मलय कुमार साहू कहा :-
जिसका सबल पक्ष है कि भरतमुनि के अभिनय प्रसंग आहायाभिनय में इसका जिक्र किया गया है। इसके बहूरूपम मुखाकृति मुखौटा, वस्त्रभूषण एवं अस्त्र-शस्त्र आदि विश्लेषणीय हैं। सरायकेला छऊ नृत्य के विशिष्ट वाद्य यंत्र और उसके संगीत विधान ताल और लय का भी इसकी शास्त्रीय ऊंचाई को काफी आगे बढ़ाता है।
छऊ नृत्य की नगरी सरायकेला, गुरु मलय कुमार साहू को सलाम,बच्चों को सीखा रहे छऊ नृत्य देखे उनका क्या कहना…..
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जिसमें रिचुअल धार्मिक संस्कारों का समावेश भी है…..
बताते चलें कि गुरु मलय कुमार साहू को वर्ष 1979 में भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर द्वारा नेशनल अवार्ड ऑफ स्कॉलरशिप से नवाजा जा चुका है। इसके अलावा 1987 में भारत सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय द्वारा सीनियर स्कॉलरशिप, वर्ष 2000 में जूनियर फैलोशिप और वर्ष 2009 में सीनियर फेलोशिप से नवाजा जा चुका है। गुरु मलय कुमार साहू देश के विभिन्न मंचों सहित विदेशी धरती पर फ्रांस, साउथ कोरिया, मलेशिया, इंडोनेशिया, रूस, इटली, मेक्सिको, अरूबा, वेनेजुएला, पनामा, कोस्टा रिका, क्यूराकोआ, मंगोलिया, ब्राजील एवं बांग्लादेश में छऊ नृत्य की प्रस्तुति कर चुके हैं।
