
इंस्टीट्यूट फॉर एजुकेशन महाविद्यालय में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का हुआ शुभारंभ…
सरायकेला:संजय मिश्रा । इंस्टीट्यूट फॉर एजुकेशन महाविद्यालय में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का शुभारंभ किया गया। जिसके प्रथम दिवस पर डिविजनल कमिश्नर कोल्हान सह कुलपति कोल्हन विश्वविद्यालय चाईबासा हरि कुमार केसरी बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। और विशिष्ट अतिथि के तौर पर डीजी साइंस एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल देहरादून से आए प्रोफेसर दुर्गेश पंत कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर सभी अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय की ओर से पारंपरिक नृत्य एवं संगीत के साथ किया गया। और अतिथियों को पुष्पगुच्छ एवं साल तथा स्मृति चिन्ह प्रदान करते हुए उनका स्वागत किया गया। इसके बाद मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्वलित कर अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का शुभारंभ किया गया।

स्वागत भाषण महाविद्यालय के निदेशक आर एन महांती द्वारा और कॉन्फ्रेंस से संबंधित जानकारी प्रोफेसर शुक्ला महांती द्वारा दिया गया। मौके पर अपने संबोधन में हरि कुमार केसरी ने कहा कि ए आई संबंध में जागरूक करने के लिए यह अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस सभी के लिए मिल का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह सभी को अपने कार्यों में मदद करेगा। विशिष्ट अतिथि दुर्गेश पंत ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रयोग आवश्यक भी और जरूरत भी है। इसलिए बहुत ही सावधानी के साथ इसका प्रयोग करें। भविष्य में ए आई मनुष्य के मस्तिष्क से भी ज्यादा तेज कार्य करेगा। मुख्य नोट वक्तव्य के रूप में इमरेट्स युक्तिरमिटि अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय वियतनाम से आए प्रोफेसर नारायण सी देवनाथ द्वारा भविष्य में ए आई के महत्व और उपयोग को बताते हुए विद्यार्थियों के ज्ञान को बढ़ाने में मदद करने की बात बताई गई।
उन्होंने कहा कि ए आई अपने प्रभाव से मनुष्य के मस्तिष्क को भी पीछे छोड़ देगा। बस इसका उपयोग सावधानी से करना है। समापन पर महाविद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती स्वीटी सिन्हा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। इस अवसर पर समस्त शिक्षक शिकाओं के साथ पेपर प्रस्तुत करने के लिए आईसीएआर नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ़ूड एंड माउथ डिसॉर्डर उड़ीसा यूनिवर्सिटी ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी के समरेंद्र दास, टाटा कॉलेज के डॉ संजीव आनंद, बिहार बोधगया मगध विश्वविद्यालय मेघा ज्योति के पल्लव कुमार दास, बीआईटी मेसरा रांची के डॉक्टर इंद्रजी मुखर्जी, इंस्टीट्यूट फॉर एजुकेशन की प्राचार्या डॉ स्वीटी सिन्हा एवं डॉ एपीजे अब्दुल कलाम विश्वविद्यालय लखनऊ के मयंक मिश्रा द्वारा प्रस्तुत किया गया। राष्ट्रगान के साथ प्रथम दिवस की अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का समापन किया गया।

