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गांवों से हो कला का विकास तो वास्तविक रुप से सांस्कृतिक माटी की खुशबू बिखरेगी।

सरायकेला-खरसावां (संजय मिश्रा) संगीत नाटक एकेडमी नई दिल्ली के इनटेंजिबल कल्चरल हेरिटेज सेल द्वारा नई दिल्ली में आयोजित इनटेंजिबल कल्चरल हेरीटेज फेस्टिवल का उद्घाटन भारत सरकार की स्टेट फॉर एक्सटर्नल अफेयर्स एंड कल्चर मंत्री मीनाक्षी लेखी ने की। इस अवसर पर इनटेंजिबल कल्चरल हेरीटेज सेल के सदस्य द्वारा पेपर प्रेजेंटेशन के पश्चात प्रेजेंटेशन ऑफ केस स्टडी ऑन आईसीएच एलिमेंट्स एंड स्टेकहोल्डर टॉक ऑन छऊ पर संवाद का आयोजन किया गया। जिसमें डॉ संजय चौधरी द्वारा छऊ चैलेंजेज एंड पॉसिबिलिटीज, ए ग्राउंड रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया। जिसके बाद संगीत नाटक एकेडमी एवार्डी पद्मश्री पंडित गोपाल प्रसाद दुबे द्वारा उक्त विषय पर विस्तृत विचार प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर सरायकेला राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के निदेशक गुरु तपन कुमार पटनायक ने छऊ- एक अनमोल सांस्कृतिक विरासत एवं अमृत धरोहर पर अपने विचार एवं सुझाव रखते हुए कहा कि कला का विकास ग्रामीण क्षेत्र से किया जाए। ताकि एक सुंदर सांस्कृतिक वातावरण तैयार किया जा सके। सभी छऊ कला विधाओं का उत्थान, नए-नए केंद्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम, वाद्य यंत्र, मुखौटा, छऊ संगीत का प्रशिक्षण ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के बच्चों को दिया जाए। कला संस्कृति, सांस्कृतिक निदेशालय झारखंड से एवं राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र सरायकेला से सामंजस्य बनाते हुए चंदनक्यारी स्थित संगीत नाटक एकेडमी केंद्र को छऊ कला को सही दिशा देकर कला एवं कलाकारों का उत्थान किया जाए। इसी प्रकार छऊ नृत्य कला को अर्मूत रखा जा सकता है।

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