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उषा अर्घ्य के साथ ही लोक आस्था व सूर्य उपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ सम्पन्न

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दुमका ब्यूरो : मौसम गुप्ता

दुमका । लोक आस्था और सूर्य उपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ आज उषा अर्घ्य के साथ संपन्न हो गया। इससे पहले सोमवार को संध्या अर्घ्य अर्पित किया गया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छठ के तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। यह पर्व मुख्य रूप से संतान सुख, परिवार के कल्याण और समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है। संध्या अर्घ्य के बाद व्रती महिलाएं छठी मइया की कथा का पाठ करती हैं। मान्यता है कि कथा पाठ के बिना व्रत अधूरा माना जाता है । चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उषा अर्घ्य देकर व्रत का समापन होता है।  विधिपूर्वक दिया गया उदीयमान सूर्य को अर्घ्य इस वर्ष 28 अक्टूबर को सूर्य उदय का समय सुबह 5:45 से 6:30 बजे तक रहा। इसी दौरान बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत विभिन्न राज्यों में व्रतियों ने उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर अपनी पूजा संपन्न की। अलग-अलग शहरों में उषा अर्घ्य की टाइमिंग स्थानीय सूर्योदय के अनुसार रही। छठ व्रत में पवित्रता, संयम और कठोर नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक माना जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान संबंधी सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही मंगलवार 28 अक्टूबर को यह महापर्व श्रद्धा और भक्ति के माहौल में संपन्न हो गया।

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