
कटहल पेड़ के नीचे पढ़ रहा देश का भविष्य, आंगनबाड़ी भवन अधूरा

सपादा गांव में लाग-भाग 12 साल से बदहाल व्यवस्था, तीन साल से अधूरा भवन, बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
भवन के अभाव में पेड़ के नीचे देश का भविष्य
चांडिल:-सरायकेला-खरसावांजिला चांडिल अनुमंडल के कुकड़ु प्रखंड अंतर्गत सपादा गांव में आंगनबाड़ी केंद्र के अभाव में छोटे-छोटे बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। भवन निर्माण में हो रही देरी के कारण पिछले तीन वर्षों से बच्चे कभी काजू तो कभी कटहल के पेड़ के नीचे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जो व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है।
आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका ने बताया कि पिछले 12 वर्षों से बच्चों को कभी किसी के घर तो कभी खुले में पढ़ाया जा रहा है। तीन साल पहले भवन निर्माण शुरू हुआ, लेकिन आज तक अधूरा है। कई बार विभागीय अधिकारियों को सूचना देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।ग्रामीण अभिभावकों में इस स्थिति को लेकर काफी नाराजगी है। बच्चा चोरी की अफवाहों के कारण वे अपने बच्चों को खुले में पढ़ने भेजने से कतराते हैं। वहीं, आंगनबाड़ी केंद्र के पास से गुजरने वाली सड़क पर लगातार वाहनों का आवागमन होता रहता है, जिससे बच्चों को धूल-मिट्टी और दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है जब यहां न तो पीने के पानी की समुचित व्यवस्था है और न ही शौचालय की सुविधा। बच्चों को धूल में बैठकर पढ़ना पड़ता है, जबकि मध्यान्ह भोजन एक जर्जर इंदिरा आवास में तैयार किया जाता है। बारिश या अन्य आपदा के समय बच्चों को उसी जर्जर भवन में शरण दी जाती है, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है।
इस मामले में कुकंड़ु प्रखंड की प्रखंड विकास पदाधिकारी राजश्री ललिता बाखला ने कहा कि उन्हें पहले इस तरह का समस्या की जानकारी नहीं थी। अब मामला संज्ञान में आने के बाद संबंधित पंचायत सचिव को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया गया है।
वहीं, ग्रामीण सह पूर्व प्रखंड प्रमुख शंकर सिंह मुंडा ने कहा कि आंगनबाड़ी भवन का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और
केवल फर्श का काम शेष है। इसे जल्द पूरा कर बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि योजना से संबंधित कोई शिलापट्ट स्थल पर नहीं लगा है।अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक इस अधूरे भवन को पूरा कर बच्चों को मूलभूत सुविधाओं के साथ सुरक्षित शिक्षा का माहौल उपलब्ध कराता है।

