
शिक्षा और संविधान के दो महान स्तंभों को श्रद्धांजलि, चाण्डिल में मनाई गई सावित्रीबाई फुले व जयपाल सिंह मुंडा की जयंती

चांडिल संवाददाता की रिपोर्ट
चांडिल । सरायकेला–खरसावां जिले के चाण्डिल प्रखंड अंतर्गत कान्दरबेड़ा स्थित राम साईं टुडू फुटबॉल मैदान में माझी बाबा इंद्र टुडू के अध्यक्षता में शिक्षा की देवी सावित्रीबाई फुले तथा संविधान सभा के सदस्य रहे जयपाल सिंह मुडा की जन्म जयंती और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।
इस अवसर पर वक्ताओं ने सावित्रीबाई फुले के शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने समाज में शिक्षा की अलख जगाई और विशेषकर महिलाओं को शिक्षित करने का मार्ग प्रशस्त किया। उनका जीवन आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। वक्ताओं ने सावित्री बाई फुले की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सावित्रीबाई फुले भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल(भारत की प्रथम महिला शिक्षिका) तथा प्रथम किसान स्कूल की संस्थापक थीं। महात्मा ज्योतिराव को महाराष्ट्र और भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन में एक सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में माना जाता है। उनको महिलाओं और अनाथ, दीन-दुखी, गरीब लोगों को शिक्षित करने के प्रयासों के लिए जाना जाता है। ज्योतिराव, जो बाद में ज्योतिबा के नाम से जाने गए सावित्रीबाई के संरक्षक, गुरु और समर्थक थे। सावित्रीबाई ने अपने जीवन को एक मिशन की तरह जिया जिसका उद्देश्य था विधवा विवाह करवाना, छुआछूत मिटाना, महिलाओं की मुक्ति और महिलाओ को शिक्षित बनाना। वे एक कवियत्री भी थीं उन्हें मराठी की आदिकवियत्री के रूप में भी जाना जाता था।
कार्यक्रम में जयपाल सिंह मुंडा के योगदान पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि संविधान निर्माण में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही है और उन्होंने आदिवासी समाज हित के साथ पूरे देश के अधिकारों की मजबूती से पैरवी की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रवींद्रनाथ सिंह ने कहा कि हम सभी शिक्षा की देवी सावित्रीबाई फुले के दिखाए मार्ग पर चलते हुए शिक्षा को आगे बढ़ाने का संकल्प लें। साथ ही जयपाल सिंह मुंडा के विचारों और संविधान में उनके योगदान से प्रेरणा लेकर समाज को सही दिशा देने का प्रयास करें। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में भी इसी मार्गदर्शन के तहत समाज के लोगों को जागरूक और प्रेरित करने का प्रयास लगातार जारी रहेगा। कार्यक्रम का समापन दोनों महापुरुषों के विचारों को आत्मसात करने और उनके आदर्शों पर चलने के संकल्प के साथ किया।
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