
इस पुल के बगल में पिछले 4 वर्षों से अधूरा पड़ा है नया पुल
सरायकेला -खरसावां (विकास कुमार) बीते दो दिनों तक यास तूफान के बीच हुए भारी बारिश में करीब 24 घंटे तक डूबी सरायकेला व खरसावां के बीच स्थित गोविंदपुर पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई। नदी का जलस्तर जब नीचे आया तो पता चला कि पानी के तेज बहाव ने पुल के एक छोर का उपरी परत बहाकर ले गई है। जिससे पुल से पानी नीचे उतरने के बाद भी सरायकेला और खरसावां के बीच आवागमन नहीं हो पाई।

आवागमन बंद होने के बाद कारण पुल के दोनों छोरों पर करीब दो किलोमीटर वाहनों की लंबी कतार लग गई। इस घटना के बाद प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों की टीम द्वारा कई घंटे की मशक्कत के बाद क्षतिग्रस्त हिस्से को भरकर यातायात को किसी तरह से शुरू किया गया। करीब 36 घंटे के बाद पुल से लोगों का आवागमन शुरू हुआ। हालांकि पुल का अभी भी मरम्मतीकरण कार्य पूरा नहीं हुआ है। धूप तेज होने के बाद इस पर पीचिंग का काम किया जाएगा। जिसके बाद पुल पूरी तरह से आवागमन हेतु ठीक हो सकेगा।

इस पुराने पुल ठीक बगल में एक नया पुल पिछले 4 वर्षों से बन रहा है। लेकिन ठेकेदार की मनमानी तथा पुल के एक छोर पर भूमि अधिग्रहण कार्य पूरा नहीं होने के कारण यह अधर में लटका है। वर्षों पूर्व बनाए गए इस पुराने पुल की ऊंचाई काफी कम है। ऐसे में जब भी नदी का जलस्तर बढ़ता है तो यह पुल डूब जाती है और आवागमन काफी प्रभावित होती है। ऐसे में लोगों में यह आक्रोश है कि क्यों प्रशासन द्वारा नए पुल को जल्द तैयार नहीं किया जाता है। इस पूरे मसले पर पीडब्ल्यूडी के कार्यपालक अभियंता निर्मल कुमार सिंह ने बताया कि यह पुल सत्यम कंस्ट्रक्शन द्वारा बनाया जा रहा है। पुल के एक छोर पर भूमि अधिग्रहण का पूरा नहीं हो पाया है। साथ ही एस्टीमेट रिवाइज के कारण भी पुल निर्माण में देरी हो रही है। इसी बीच पुल का निर्माण कर रहे सत्यम कंस्ट्रक्शन इस नए पुल के निर्माण से अपना हाथ खींच लिया है। ऐसे में अब फिर नए सिरे से बाकी बचे पुल के निर्माण हेतु टेंडर का कार्य पूरा किया जाएगा। वही क्षतिग्रस्त पुल के बारे में उन्होंने कहा कि पुल का सिर्फ ऊपरी हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। नीचे का हिस्सा ठीक है। ऐसे में क्षतिग्रस्त हिस्से को भरकर आवागमन शुरू की गई है। धूप होने के बाद इस पर पिचिंग करने के बाद यह पूरी तरह से आवागमन हेतु ठीक हो जाएगा।
