
घाटशिला : भाजपा के युवा नेता लखन मार्डि ने मनाया बाहा बोंगा पुजा…
दीपक नाग… ✍️

बाहा पूजा संथाल जनजाति का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। जो कि, प्रकृति के प्रति उनके गहरे सम्मान और कृतज्ञता को दर्शाता है। भाजपा के नेता लखन मार्डि ने परंपरागत तरीके से अपने पैतृक गांव ताराशपुर के घर में प्रकृति उपासना का पर्व बाहा / पाता बोंगा का आयोजन किया ।
लखन मार्डि कहते हैं, बाहा पूजा, सरहुल पूजा, बा: पूजा उन्हे एक जैसा ही लगता है। बाहा पूजा सार्वजनिक पूजा स्थलों जाहेर स्थलों के साथ-साथ व्यक्तिगत रुप से घरों में पूजा करते हैं। अपने घरों में बाहा पूजा को पाता पूजा भी कहते हैं ।
यह त्योहार वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है और इसे मार्च-अप्रैल के महीने में मनाया जाता है। बाहा पूजा में संथाल लोग पीपल, बरगद, साल, महुआ आदि पेड़ों, नए फूलों, नए फलों और पत्तों की पूजा करते हैं । यह त्योहार नए जीवन और प्रकृति के पुनर्जन्म का प्रतीक में माना जाता है।
बाहा पूजा में लोग पारंपरिक नृत्य और संगीत के साथ जश्न मनाते हैं। इसे हम संथाल संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। साथ ही नये युवा पीढ़ी को भी उनकी विरासत के बारे में शिक्षित बनाने का एक अवसर भी माना है।
श्री मार्डि ने कहा, बाहा पूजा पर्यावरण के महत्व को उजागर करती है और लोगों को प्रकृति के संरक्षण के लिए प्रेरित करती है। बाहा पूजा के पहले लोग प्रकृति के नए फूलों/फलों/पत्तों आदि का उपयोग नहीं करते हैं। पूजा करने के बाद ही उपयोग करते हैं। सेन्दरा (शिकार) पर्व भी बाहा पूजा के बाद ही जाते हैं।
उन्होंने कहा, बाहा पूजा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह संथाल लोगों के जीवन में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और सामाजिक भूमिका भी निभाता है।
