Advertisements
Spread the love

पोटका के नुतनडीह गांव में माघेबुरू पर्व का आयोजन धूमधाम से किया गया।

Advertisements

संवाददाता : अभिजीत सेन

जमशेदपुर /पोटका पोटका के धीरोल पंचायत अंतर्गत नुतनडीह गांव मे आदिवासी भूमिज समाज के द्वारा माघ महीने के पहली सोमवार को माघ बुरु पर्व का आयोजन धूमधाम से किया गया। यह माघ बुरू पर्व के बाद ही जंगल के नया फूल, फल, और नया पत्ता से बना हुआ पत्तल , दोंगा बना के खाना, खाने का परंपरा है। माघ बुरू पूजा आदिवासी भूमिज समाज के संस्कृति परंपरा का विरासत है, क्योंकि माघ पूजा के बाद ही नए पुराने घरों की छावनी किया जाता है ओर शुभ विवाह के लिए, देखा- देखी के लिए शुभ यात्रा का प्रारंभ किया जाता है। इस पूजा के बाद से ही नुतनडीह गांव में शादी दिया गया बेटी -बहन, पीठा, मुड़ी ओर इलिचाटु लेकर माईके आते है और जितना लेकर आता है माईके से भी वैसे लेकर जाते हैं। ये बहुत ही महत्वपूर्ण परंपरा जिंदा रखा गया है। ईस माघबुरू पूजा के दिन खेती-बाड़ी की चर्चा होती है और मजदूरी भी, साल भर का निर्धारण किया जाता है। ईस पर्व में नाया बृहस्पति सरदार, देउरी पटल सरदार, कुड़ाम नाया गुरुपद सरदार, के द्वारा सुख शांति एवं समृद्धि के लिए गांव के जायरा स्थान में साल वृक्ष के नीचे विधिवत पूजा पाठ किया जाता है । मौके पर सिद्धेश्वर सरदार, रामेश्वर सरदार, कार्तिक सरदार,दादा कान्त सरदार, विष्णु सरदार भागीरथी सरदार, रिंकू सरदार, भैरव सरदार, सुभाष सरदार ,राजू सरदार, अनिल सरदार, जयराम सरदार, रुहिया सरदार, काली पद सरदार, चंद्र मोहन सरदार, श्रीपति सरदार, के साथ काफी संख्या में नुतनडीह गांव के ग्रामीण लोग उपस्थित रहे।

 

You missed

#दरभंगा #दरभंगा #चंपारण #भागलपुर #दहशत #आतंक #दंगा #नक्सल #लूट #संथाली #आदिवासी #हरिजन # पिछड़ी जाती News Uncategorized उत्पिड़न किसान कोडरमा कोयलांचल कोल्हान क्राइम खुटी गढवा गिरीडीह गुमला गोड्डा चतरा चाईबासा चोरी जमशेदपुर जरा हटके जामताड़ा झारखण्ड टेक्नोलॉजी दिल्ली दुमका दूर्घटना देवघर धनबाद पटना पलामू पश्चिम सिंहभूम पाकुड़ पूर्वी सिंहभूम प्रशासन - सुरक्षा बल बिज़नेस बिहार बिहार बोकारो भ्रष्टाचार/अराजकता राँची राजनीति राज्य राज्यसभा रामगढ़ लाइफस्टाइल लातेहार लोकसभा लोहरदग्गा विकास कार्य विधानसभा शहर शिक्षा व रोजगार शोकाकुल संथाल सरायकेला-खरसावाँ साहिबगंज सिमडेगा सुर्खियां स्वास्थ्य हजारीबाग

रांची : पंचायती राज का सपना धरातल में कहां तक सच हो पाया है ?