
अफीम-पोस्ता का उत्पादन गैरकानूनी : एलएडीसीएस चीफ

Arjun Kumar…..✍️
रांची । झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष के दिशा-निर्देश तथा सदस्य सचिव और न्यायायुक्त, रांची के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) द्वारा रक्षा शक्ति यूनिवर्सिटी, गोस्नर कॉलेज एवं संत जेवियर स्कूल, रांची में छात्र-छात्राओं के लिए नालसा की योजना ‘डॉन’ के तहत नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में डालसा सचिव राकेश रौशन उपस्थित रहे। इस अवसर पर एलएडीसीएस चीफ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 47 राज्य को निर्देश देता है कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मादक पदार्थों के सेवन को औषधीय उपयोग को छोड़कर समाप्त करने का प्रयास किया जाए। उन्होंने बताया कि अफीम या पोस्ता के उत्पादन अथवा कब्जे पर एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत मात्रा के आधार पर 20 वर्ष तक के कठोर कारावास और 2 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। बार-बार अपराध करने पर मृत्युदंड तक की सजा हो सकती है। उन्होंने नालसा के टोल फ्री नंबर 15100 की जानकारी भी दी। डिप्टी एलएडीसी राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि कांके स्थित पुनर्वास केंद्रों एवं विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा नशा पीड़ितों के उपचार में सहयोग दिया जा रहा है। सीआईपी और रिनपास में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के लीगल एड क्लिनिक संचालित हैं, जहां नशा प्रभावित व्यक्तियों को कानूनी एवं उपचार संबंधी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
<span;>डिप्टी एलएडीसी कविता खाती ने कहा कि नशा से तन-मन-धन की हानि होती है तथा अत्यधिक सेवन से व्यक्ति मानसिक रोग का शिकार हो सकता है। उन्होंने नालसा की योजनाओं – साथी, आशा, जागृति एवं संवाद – पर भी प्रकाश डाला और बताया कि इन योजनाओं के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। लाइफ सेवर्स एनजीओ के प्रमुख अतुल गेरा ने कहा कि नशा देश की सामाजिक संरचना को कमजोर कर रहा है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे ड्रग्स पेडलरों के किसी भी लालच में न आएं और सतर्क रहें। एनसीबी के मनोहर मंजूल ने बताया कि झारखंड में नशे की समस्या पर नियंत्रण के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की भूमिका महत्वपूर्ण है। गृह मंत्रालय द्वारा मादक पदार्थों से संबंधित सूचना देने हेतु मानस हेल्पलाइन (टोल फ्री नंबर 1933) शुरू की गई है। सीआईडी के रिजवान अंसारी एवं ड्रग्स कंट्रोल विभाग के स्वपनिल निखिल ने मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी देते हुए बताया कि कैसे बच्चों और युवाओं को इस अवैध कारोबार में उपयोग किया जाता है तथा साधारण खांसी की सिरप जैसी चीजों का भी दुरुपयोग किया जाता है। वक्ताओं ने कहा कि नशा व्यक्ति, परिवार तथा समाज के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। कई मामलों में नशे की शुरुआत 16 वर्ष या उससे कम आयु से हो जाती है। पुनर्वास केंद्रों में बढ़ती संख्या एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। यदि रांची में नशे की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण किया जाए तो अपराध दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। कार्यक्रम में विधि की छात्राएं ऐश्वर्या कुमारी, उजरा निगार, काजल कुमारी, स्नेही पांडे, रितिका कुमारी, पीएलवी प्रदीप नाग, संध्या कुमारी, भारती शाहदेव सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

