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“क्या कोई सरकारी कर्मचारी अपनी निजी गाड़ी पर ‘झारखंड सरकार’ का बोर्ड लगाकर खुलेआम घूम सकता है? क्या यह सरकारी पहचान का दुरुपयोग है या फिर नियमों की अनदेखी? सरायकेला-खरसावां के गम्हरिया अंचल से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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रिर्पोटर – जगबंधु महतो

गम्हरिया : सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया अंचल कार्यालय में पदस्थापित बड़ा बाबू तरुण ठाकुर पर अपने निजी वाहन पर ‘झारखंड सरकार’ का बोर्ड लगाकर नियमित रूप से आवागमन करने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि वाहन संख्या JH05DK-2445 पर सरकारी बोर्ड लगाकर वे कार्यालय से जमशेदपुर स्थित अपने आवास तक आवाजाही करते हैं।
मौके पर ली गई तस्वीरों में कथित तौर पर निजी वाहन के विंडशील्ड पर ‘झारखंड सरकार’ लिखा बोर्ड स्पष्ट दिखाई देता है। इसको लेकर स्थानीय लोगों के बीच चर्चा तेज है। लोगों का कहना है कि यदि वाहन निजी है, तो उस पर सरकारी पहचान का उपयोग किस नियम के तहत किया जा रहा है? मोटर वाहन अधिनियम और सरकारी सेवा आचरण नियमों के अनुसार सरकारी पहचान, बोर्ड या प्रतीक का उपयोग केवल अधिकृत परिस्थितियों में ही किया जा सकता है। यदि किसी निजी वाहन पर बिना वैधानिक अनुमति के सरकारी पहचान प्रदर्शित की जाती है, तो मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए ताकि सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे।

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