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जमशेदपुर : बिहड़ लखाईडिह के जंगलों में पारंपरिक हर्बल की खोज में IIT मुंबई से पहुंचे शोध कर्ता टीम

प्रभाकर…✍️

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# डुमरिया की पारंपरिक हर्बल चिकित्सा पर होगा वैज्ञानिक अध्ययन, लाखाईडिह पहुंचे वरिष्ठ शोधकर्ता

# झारखंड और उड़ीसा के तराई मे पहाड़ी पर प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा छोटा सा है गांव लखाईडिह

# गांव के लोग नशा से कोशों दूर पर, औषधि ज्ञान से है भरपूर

12 जुलाई : पूर्वी सिंहभूम के आदिवासी बहुल डुमरिया प्रखंड के पहाड़ी पर बसा गांव लाखाईडिह में पारंपरिक हर्बल चिकित्सा और स्थानीय औषधीय वनस्पतियों के वैज्ञानिक अध्ययन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हुई है।

आईआईटी मुंबई के पूर्व प्रोफेसर और चिकित्सा अनुसंधान से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. देवतोष दत्ता ने गांव का दौरा कर ग्राम प्रधान कान्हु राम टुडू एवं ग्रामीणों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने वर्षों से संरक्षित आदिवासी पारंपरिक उपचार पद्धतियों और औषधीय पौधों के उपयोग से संबंधित जानकारी जुटाई।

इस दौरे के क्रम में वानांचल से अपनी बातें साझा करते हुए डॉ. दत्ता ने कहा, लाखाईडडिह और उसके आसपास का क्षेत्र जैव विविधता तथा औषधीय वनस्पतियों के लिहाज से बेहद समृद्ध है। यहां उपलब्ध कई दुर्लभ जड़ी-बूटियां आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं। उनका मानना है कि इन वनस्पतियों का वैज्ञानिक परीक्षण और दस्तावेजीकरण किया जाए तो चिकित्सा विज्ञान को नई संभावनाएं मिलेंगी । साथ ही पारंपरिक ज्ञान को वैश्विक पहचान भी प्राप्त हो सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि डुमरिया के इन क्षेत्रों मे मेडिसिन रिसर्च के लिए काफी संभावनाएं मौजूद है। यदि सरकारी एजेंसियों और अनुसंधान संस्थानों का सहयोग मिले तो यह इलाका भविष्य में औषधीय अनुसंधान का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

ग्राम प्रधान कान्हु राम टुडू ने वैज्ञानिक दल का पारंपरिक रीति-रिवाज से स्वागत किया और कहा कि गांव के लिए यह पहला अवसर है, जब कोई शोधकर्ता दल स्थानीय चिकित्सा परंपरा को समझने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उसका अध्ययन करने पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने पीढ़ियों से संचित औषधीय ज्ञान शोध दल के साथ साझा किया है तथा आगे भी हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया। इस अवसर पर डॉ. देवतोष दत्ता के साथ अनिर्बान चौधरी, राकेश जैन, शेख शेरियल, भैरव महाराज और सत्य प्रकाश भी मौजूद रहे।

बहरहाल, सरकारी महकमों और सरकार के ईच्छा शक्ति पर निर्भर करता है कि, देश और दुनिया में लखाईडिह जैसी गुमनामी में छुपे हुए प्रतिभाओं को व्यवहार में ला सकते हैं कि नहीं। कहते हैं, कुछ अच्छा करना है तो अपनी सोच बदलने की जरूरत होती है। तब जाकर मुकाम हासिल होती है।

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