
महिलाएं प्रत्येक क्षेत्र में परचम लहरा रही हैं : डालसा

Arjun Kumar Pramanik……✍️
रांची । न्यायामूर्ति-सह-कार्यपालक अध्यक्ष झालसा सुजीत नारायण प्रसाद के निर्देश पर एवं सदस्य सचिव झालसा कुमारी रंजना अस्थाना के आदेश पर न्यायायुक्त-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार रांची अनिल कुमार मिश्रा-1 के नेतृत्व में डालसा सचिव राकेश रौशन की देखरेख में आज 08 मार्च को मांडर प्रखंड के हेशमी गांव स्थित शेख भिखारी स्टेडियम तथा कस्तुरबा गांधी आवासीय विद्यालय, मांडर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अपर एलएडीसी चीफ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, वार्डन इंदू लकड़ा, पीएलवी सुमन ठाकुर, विनिता कुमारी, सोनी कुमारी, पुनम देवी, कालेन्द्र गोप, तालिब अंसारी, शमी अंसारी, राजा वर्मा सहित अन्य उपस्थित थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एलएडीसी चीफ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि महिलाएं पूजनीय हैं और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। महिलाओं और बच्चियों पर अत्याचार की घटनाएं बढ़ रही हैं, ऐसे में समाज को इसके विरुद्ध ठोस कदम उठाने होंगे। यदि इसे नहीं रोका गया तो महिलाओं का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है। समाज में ऐसा सकारात्मक परिवर्तन लाना होगा जिससे आने वाली पीढ़ी की महिलाओं को बेहतर वातावरण मिल सके। पीएलवी सुमन ठाकुर ने कहा कि महिलाएं आज प्रत्येक क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। महिलाएं प्रधानाध्यापिका, डॉक्टर, शिक्षिका, मुखिया बनकर समाज की सेवा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं जमीन से लेकर अंतरिक्ष तक अपना परचम लहरा रही हैं। साथ ही उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकार, रांची द्वारा प्रदान की जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता एवं महिला कानूनों की जानकारी भी दी। वार्डन इंदू लकड़ा ने कहा कि महिलाओं को हम माता, बहन, बेटी और बहू के रूप में देखते हैं। महिलाओं के बिना समाज के अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि आज ऐसा समय आ गया है कि महिलाओं को बाहर निकलते समय सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतनी पड़ रही है।
विनिता कुमारी एवं सोनी कुमारी ने कहा कि 08 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। महिला के बिना ब्रह्मांड और जीवन की कल्पना संभव नहीं है। नारी हर क्षेत्र में समाहित है और समाज की आधारशिला है। पीएलवी पुनम देवी ने कहा कि महिलाओं का सम्मान करना ईश्वर का सम्मान करने के समान है।

