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दुमका : “जल ही जीवन है” का श्लोगन को सार्थक बनाने से आजमी फेल है झारखंड के राज्य सरकार…

मौसम गुप्ता… ✍️

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# राज्य निर्माण के ढाई दशक बाद भी स्वच्छ पेयजल के लिए तरस रहे आदिम जनजाति के 22 परिवार।

# एक किमी दूर स्थित 1955 में बने कुएं का दूषित पानी पीने को विवश है नामोडीह गांव अंतर्गत पहाड़िया टोला के ग्रामीण।

राज्य निर्माण के ढाई दशक के बाद भी गोपीकांदर प्रखंड अंतर्गत नामोडीह गांव के पहाड़िया टोला में रहने वाले आदिम जनजाति के करीब 22 परिवार पिछले छह महीनों से गंभीर पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं। टोला में उपलब्ध दो सोलर टंकी और दो चापाकलों में से एक सोलर टंकी तथा दोनों चापाकल कई वर्षों से खराब पड़े हैं। एक समय विभाग द्वारा इन्हें चालू करने का प्रयास भी किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली।

ग्रामीणों के अनुसार, दूसरी सोलर टंकी, जो अब तक एकमात्र सहारा थी, वह भी करीब छह महीने से खराब पड़ी है। ग्रामीणों ने बताया कि यह सोलर टंकी वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर लगाई गई थी। ग्रामीणों ने बताया कि लगभग एक महीने पूर्व उन्होंने प्रखंड विकास पदाधिकारी को लिखित आवेदन देकर समस्या के समाधान की मांग की थी। बीडीओ के निर्देश पर सचिव और मिस्त्री गांव पहुंचे थे। जांच के दौरान मिस्त्री ने बताया कि मोटर जल चुका है। वह मोटर खोलकर ले गया और बाद में सूचना दी कि मोटर की मरम्मत संभव नहीं है। सचिव ने ग्रामीणों व प्रमुख को आवेदन देने की सलाह दी। इसके बाद ग्रामीणों ने प्रमुख को व्हाट्सएप के माध्यम से आवेदन भेजकर फोन पर भी जानकारी दी।
ग्रामीणों का कहना है कि सोलर टंकी और चापाकलों के खराब होने के कारण उन्हें पीने के पानी के लिए करीब एक किलोमीटर दूर पहाड़ के नीचे स्थित खेत के पुराने कुएं तक जाना पड़ता है। यह कुआं वर्ष 1955 में बना था। वहां तक पहुंचने का रास्ता पथरीला, ढलानयुक्त और जोखिम भरा है। महिलाएं छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लेकर इस कठिन रास्ते से पानी लाने को मजबूर हैं।

पानी की समस्या के कारण बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि सांप-बिच्छू के काटने और रास्ते के पत्थरों से दुर्घटना का खतरा हमेशा बना रहता है। पानी लाने के कार्य में महिला,पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे सभी शामिल रहते हैं| ग्रामीणों का कहना है कि पानी की व्यवस्था करने में उनका अधिकांश समय खर्च हो जाता है, जिसके कारण वे रोजगार और मजदूरी के लिए बाजार नहीं जा पाते। इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। बच्चे नियमित रूप से आंगनबाड़ी और स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी चिंता जताई कि कुएं का पानी स्वच्छ नहीं होने के कारण बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और दुमका प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द सोलर टंकी चालू कराई जाए। साथ ही, जब तक सोलर टंकी चालू नहीं होती, तब तक प्रतिदिन दो पानी टैंकर उपलब्ध कराए जाएं।

इस मौके पर बुधनी महारानी, सोनामुनी महारानी, शांति महारानी, सोनी महारानी, फुलमुनी महारानी, काजल महारानी, लालमुनी महारानी, चिंतामुनी महारानी, दुर्गा देहरी, देवेंद्र देहरी, पुलु देहरी, गणेश देहरी, शैलेन्द्र देहरी, मोहन देहरी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

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