
डुमुरिया : स्वर्ण जयंती समारोह के दिन लखाईडीह गांव एक नया पहचान बनाने की दिशा में…
दिवाकर… ✍️

झारखंड के एक पहाड़ी के चोटी पर बसा एक गांव है लखाईडिह। भौगोलिक और प्राकृतिक दृष्टि से झारखंड और उड़िसा दोनों राज्यों के संगम बसा हुआ है, खुबसूरत वादियों से परिपूर्ण लखाईडिह।
डुमरिया प्रखंड के सुदूरवर्ती लखाईडीह गांव में आयोजित ऑल इंडिया सरना धर्म चेमेद आसड़ा आश्रम के स्वर्ण जयंती समारोह में उस परिवर्तन की कहानी सामने आई, जिसने एक समय उपेक्षित रहे इस गांव को विकास की मुख्यधारा से जोड़ दिया।
कार्यक्रम में ग्राम प्रधान कान्हु राम टुडू नेअपने संबोधन में भावुक स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब लखाईडीह पहुंचना अत्यंत कठिन था—सड़कें नहीं थीं और बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। वर्ष 1997 में प्रखंड विकास पदाधिकारी के रूप में डुमरिया में पदस्थापित होने के दौरान उन्होंने पहली बार इस गांव का दौरा किया था।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 में गांव को गोद लेने के बाद यहां विकास की नई शुरुआत हुई। स्कूल का निर्माण हुआ, सड़कों का जाल बिछा और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी। उन्होंने गर्व जताते हुए कहा कि आज लखाईडीह के बच्चे मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जो पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक है।
जल जीवन मिशन, जल शक्ति मंत्रालय के अपर सचिव एवं अभियान निदेशक केके सोन ने अपनी भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों में गांव की स्थिति में उल्लेखनीय बदलाव आया है। जहां पहले केवल 15 बच्चे स्कूल जाते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 312 हो गई है। कल्याण विभाग द्वारा बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग छात्रावास की व्यवस्था भी की गई है।
सोन ने विशेष रूप से बालिका छात्रावास की छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़ें। यदि कोई बाधा आए, तो वे सीधे जिला अधिकारी को पत्र लिखकर अपनी समस्या रखें।
उन्होंने समाज में नशामुक्ति और अंधविश्वास के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों को सेवा, संस्कार और नैतिक मूल्यों के साथ जिम्मेदार नागरिक बनाना आवश्यक है। उन्होंने ग्रामीण बच्चों से इंजीनियरिंग, मेडिकल और कानून की पढ़ाई की ओर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
इस मौके पर उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने कहा कि दो दशक पहले एक सरकारी अधिकारी के रूप में कमल किशोर सोन द्वारा शुरू की गई पहल आज एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को विश्वास में लेकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का यह प्रयास अनुकरणीय है।
स्वर्ण जयंती समारोह न केवल एक संस्था की उपलब्धियों का उत्सव बना, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि संकल्प, नेतृत्व और सामूहिक प्रयास से किसी भी दूरस्थ क्षेत्र को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
