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घाटशिला : मंईया सम्मान योजना ने मंईयाओं के चेहरों में हंसी लायी…

दीपक नाग… ✍️

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घाटशिला : झारखंड राज्य के जरुरत मंद महिलाओं के बैंक एकाउंट में मुख्यमंत्री मंईया सम्मान योजना की राशि आते ही चेहरों में हंसी और आंखों में चमक नजर आने लगी।

फरवरी माह के तीसरे और मार्च माह के पहले सप्ताह में लगातार दो बार मंईया सम्मान योजना का ढाई-ढाई हजार रूपए बैंक के खाते में आते ही जंगल की आग की तरह वादियों में यह खबर फैल गई। एटीएम और बैंकों में महिलाओं की भीड़ लगने लगी। इतना तो है, जो महिलाएं बैंक या एटीएम जाने से कतराती थीं, अब झिझक अपने बैंकिंग कार्य खुद ही निपटाने लगी है।

बता दूं कि, पहली बार मंईया सम्मान योजना जब झारखंड सरकार ने आरंभ किया था तब कुछ महीनों के बाद विविध जांच प्रक्रिया के नाम पर  यह राशि का आवंटन होना बंद हो गया था। फिर से महिलाओं से आवेदन भरवाया गया । जिसमें कुछ महीलाओं के खाते में योजना का राशि आने लगे तो कुछ महिलाओं को निराशा हाथ लगी। अनेक तरह के प्रश्नों को लेकर प्रखंड कार्यालय के दफ्तरों और बैंकों का चक्कर काटते रहें। 2025 नवम्बर के माह में फिर से यह राशि आवंटित किया गया। इस बार भी कुछ मंईयाओं के बैंक खाते में पैसा नहीं आया जबकि इस योजना के मापदंड के दायरे में वे आती है। जिस कारण इनके चेहरों में मायूसी और निराशा छाना लाजमी है।

वर्तमान समय में मुख्यमंत्री मंईया सम्मान योजना उस वक्त आर्थिक मदद किया जब शिव रात्रि, होली, बाहा/सरहुल मनाया गया और रमजान का महीना चल रहा है । जिस देश के अस्सी प्रतिशत लोगों को बीपीएल राशनकार्ड या मुफ्त के अनज पर निर्भर करना पड़ता है, उनके जीवन में मंईया सम्मान योजना कितनी बड़ी सहायता है यह वही जान सकता है जो दो जून की रोटी के लिए चिंता में रहती हैं।

बशर्ते पिछले वर्ष की तरह इस बार यह योजना मझधार में डगमगाने न लगे। ताकि सरकार अपनी की गई वादों पर अडिग खड़ा रह सके । जाहिर है, मंईया अगर है खुश, तो भैया क्यों रहेंगे दुःख ।

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