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जमशेदपुर : शहर के प्रसिद्ध लेखक अंशुमन भगत पर बर्बर हमला, इंसानियत हुई शर्मसार

रिपोर्ट : दीप पाल 

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जमशेदपुर: शहर के प्रतिष्ठित लेखक अंशुमन भगत पर हुए नृशंस हमले ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। समाज को जागरूक करने वाले इस लेखक के साथ जो अमानवीयता हुई, उसने इंसानियत को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

हमले की विभीषिका

मिली जानकारी के अनुसार, 01 मार्च 2025 को शाम 05:15 बजे अंशुमन भगत अपने कमरे में अकेले थे, जब मुकेश सिंह (39), जितेंद्र सिंह (40) और उनके दो साथियों ने उनके घर में घुसकर क्रूरतम हमला किया। पहले उन्हें बुरी तरह पीटा गया, जातिसूचक गालियां दी गईं और जबरन शराब पिलाने की कोशिश की गई। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं।

आरोपियों ने अंशुमन भगत के साथ अप्राकृतिक कृत्य किया, उनकी गुदा में शराब की बोतल डाल दी और उनके मुंह पर पेशाब तक कर दिया। जब उन्होंने विरोध किया, तो उनके हाथ-पैर बांधकर गला दबाकर हत्या करने का प्रयास किया गया। हमलावरों ने धमकी दी कि यदि इस घटना की शिकायत की गई, तो उन्हें और उनके परिवार को भी मौत के घाट उतार दिया जाएगा।

हमलावरों का आपराधिक इतिहास

सूत्रों के अनुसार, मुकेश सिंह और अंशुमन भगत पहले करीबी मित्र थे। लेकिन जब अंशुमन को पता चला कि मुकेश अवैध धंधों में लिप्त है और उसे भी शामिल करने की कोशिश कर रहा है, तो उन्होंने दूरी बना ली। इससे बौखलाए मुकेश ने अंशुमन के खिलाफ झूठा केस दर्ज करवा दिया, जिसके चलते उन्हें जेल जाना पड़ा। लेकिन जब वह जमानत पर छूटे, तो उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को मुकेश सिंह की अवैध संपत्तियों की जानकारी दे दी। इस खुलासे से तिलमिलाए अपराधी ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।

न्याय की मांग

इस घटना ने पूरे जमशेदपुर में आक्रोश फैला दिया है। एक लेखक, जिसने अपने विचारों से समाज को दिशा देने का कार्य किया, उसके साथ हुई यह दरिंदगी हमारे लोकतंत्र और कानून-व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

क्या अपराधी इतने बेखौफ हो गए हैं कि वे खुलेआम पुलिस और न्यायपालिका को खरीदने का दावा कर सकते हैं?

जनता की मांग है कि पुलिस त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार करे और उन्हें कठोरतम सजा दिलाए। प्रशासन के लिए यह परीक्षा की घड़ी है कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है।

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