शिकायतों के बाद हटे, फिर लौटे आदित्यपुर थाना में! आरक्षी की तैनाती पर उठे कई गंभीर सवाल

रिर्पोटर – जगबंधु महतो
आदित्यपुर: आदित्यपुर थाना में एक आरक्षी की दोबारा तैनाती और थाना प्रभारी के सुरक्षा कर्मी (बॉडीगार्ड) के रूप में जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और कुछ नागरिकों ने इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए पुलिस प्रशासन से मामले में पारदर्शिता बरतने तथा पूर्व में हुई शिकायतों और विभागीय जांच की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, पूर्व पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी के कार्यकाल के दौरान आदित्यपुर थाना से जुड़े कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ एक महिला द्वारा गंभीर शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पुलिसकर्मी रात के समय उसके घर पहुंचे, तोड़फोड़ की, मारपीट की, महिला के साथ अभद्र व्यवहार किया तथा उसके बेटे को थाने ले जाकर प्रताड़ित किया। शिकायत में झूठे ड्रग्स मामले में फंसाने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया था।
बताया जाता है कि शिकायत के बाद तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई प्रारंभ की थी। इसी क्रम में संबंधित आरक्षी को आदित्यपुर थाना से हटाकर अन्य स्थान पर पदस्थापित किया गया था। हालांकि विभागीय जांच के अंतिम निष्कर्ष या किसी दंडात्मक कार्रवाई को लेकर अब तक कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि उक्त आरक्षी लंबे समय तक आदित्यपुर थाना में पदस्थापित रहे और उनके कार्यकाल के दौरान समय-समय पर विभिन्न प्रकार की शिकायतें सामने आती रहीं। कुछ लोगों ने उन पर अवैध गतिविधियों से जुड़े लोगों के साथ कथित संपर्क और निर्दोष व्यक्तियों को फंसाने जैसे आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही पुलिस विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है।
इधर, हाल के दिनों में आदित्यपुर क्षेत्र में ड्रग्स से जुड़े मामलों की बढ़ती चर्चाओं के बीच आरक्षी की पुनः तैनाती को लेकर सवाल और तेज हो गए हैं। रामबड़िया बस्ती में एक महिला को ड्रग्स मामले में हिरासत में लेने और बाद में छोड़ने की घटना तथा सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो को लेकर भी विभिन्न तरह की चर्चाएं सामने आई हैं। हालांकि इन घटनाओं और वायरल वीडियो से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
सामाजिक संगठनों का कहना है कि पुलिस व्यवस्था में जनता का विश्वास सर्वोपरि है। उनका मानना है कि यदि किसी पुलिसकर्मी के विरुद्ध पूर्व में गंभीर शिकायतें दर्ज रही हों, तो उसकी दोबारा संवेदनशील पद पर तैनाती से पहले विभागीय जांच की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने जिला पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा यदि कोई विभागीय जांच लंबित है तो उसकी अद्यतन स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है।
फिलहाल इस पूरे मामले पर आदित्यपुर थाना प्रभारी अथवा जिला पुलिस के किसी वरिष्ठ अधिकारी की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब लोगों की निगाहें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस विषय पर क्या स्पष्टीकरण देता है और उठ रहे सवालों का किस प्रकार जवाब देता है।

